अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित होने वाले चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन के मामले से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने आज, 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। हालांकि, इस रिपोर्ट को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, उसने राम मंदिर प्रशासन और शासन स्तर पर हड़कंप मचा दिया है।
6 दिनों तक अयोध्या में डेरा, 5 दर्जन से ज्यादा लोगों से कड़ी पूछताछ के बाद तैयार हुई रिपोर्ट
‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की विशेष मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बेहद संवेदनशील चंदा चोरी मामले की जांच का जिम्मा SIT को सौंपा था। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली इस हाई-प्रोफाइल टीम में आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। इस 3 सदस्यीय टीम ने सोमवार (15 जून) को अयोध्या पहुंचकर अपनी जांच शुरू की थी। टीम ने लगातार छह दिनों तक अयोध्या में डेरा डालकर इस घोटाले की परतें खंगालीं और बैंक अधिकारियों, ऑडिटर्स व ट्रस्ट से जुड़े पांच दर्जन (60 से अधिक) से ज्यादा लोगों से कड़ी पूछताछ की।
SIT प्रमुख विजय विश्वास पंत बोले- ‘रिपोर्ट बेहद गोपनीय, शासन लेगा आगे का फैसला’
प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद SIT प्रमुख और लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील और रिपोर्ट पूरी तरह से गोपनीय है, इसलिए हम अभी सार्वजनिक रूप से इसके निष्कर्षों के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बता सकते। हमने अपनी जांच की पूरी टाइमलाइन और निष्कर्ष शासन को उपलब्ध करा दिए हैं।”
अभी तक किसी को क्लीन चिट नहीं, इन 5 बड़ी बातों से हिला प्रशासनिक अमला
भले ही रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक SIT की इस प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है:
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FIR दर्ज करने की बड़ी सिफारिश: SIT ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए कुछ रसूखदार कर्मचारियों और आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से मुकदमा (FIR) दर्ज करने की कड़ी सिफारिश की है।
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किसी को भी क्लीन चिट नहीं: जांच एजेंसी ने साफ कर दिया है कि इस घोटाले में अभी तक किसी भी संदिग्ध अधिकारी या कर्मचारी को क्लीन चिट नहीं दी गई है।
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अपराधियों और ट्रस्ट के रिश्तों की पड़ताल: नोटों की गणना करने वाले कर्मचारियों के चयन की पूरी प्रक्रिया और उनके साथ ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के संभावित पारिवारिक या व्यावसायिक संबंधों की भी गहन पड़ताल की गई है।
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बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध: मंदिर की आंतरिक व्यवस्था, सुरक्षा और संचालन के लिए जिम्मेदार कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका भी अब सीधे तौर पर जांच के घेरे में आ गई है।
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निगरानी तंत्र फेल: रिपोर्ट में इस बात का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया है कि प्रशासनिक निगरानी तंत्र और जवाबदेही में कहां-कहां बड़ी चूक हुई, जिससे इतनी बड़ी चोरी को अंजाम दिया जा सका।
8 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी के मिले पुख्ता सबूत, करीब 3 करोड़ रुपये कैश बरामद
रामलला के चढ़ावे में हुए इस खेल की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच के दौरान कुल आठ करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता और हेरफेर के पुख्ता सबूत मिले हैं। हालांकि, मुस्तैदी दिखाते हुए जांच एजेंसी ने अब तक 2.98 करोड़ रुपये (करीब 3 करोड़) की नकदी सफलतापूर्वक बरामद कर ली है। जांच समिति को सरकार की तरफ से 7 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम (Final) रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद अब माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर दोषियों के खिलाफ ऐसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी जो नजीर बनेगी।














