जख्म पुराने, लापरवाही वही! अलीगंज से पहले लखनऊ के इन  खौफनाक अग्निकांडों ने भी दहला दी थी नवाबों की नगरी, क्या कभी सुधरेगा सिस्टम?

लखनऊ। राजधानी लखनऊ का पॉश इलाका अलीगंज सोमवार को उस वक्त चीख-पुकार और भगदड़ से दहल उठा, जब वहां स्थित एक नामी प्राइवेट कोचिंग संस्थान में भीषण आग लग गई। आसमान छूती आग की लपटों और धुएं के गुबार ने देखते ही देखते आस-पास की कई अन्य इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की 14 गाड़ियों ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर पूरे इलाके को खाली कराया। इस दर्दनाक हादसे में कई बच्चों के गंभीर रूप से झुलसने की खबर है।

लेकिन लखनऊ में फायर सेफ्टी मानकों की धज्जियां उड़ने और लापरवाही की वजह से मासूम जिंदगियों के दांव पर लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अगर इतिहास के पन्नों को पलटें, तो लखनऊ में पहले भी ऐसे कई सरकारी और निजी संस्थानों में खौफनाक अग्निकांड हो चुके हैं, जिन्होंने पूरी राजधानी को हिलाकर रख दिया था। आइए डालते हैं उन 6 बड़े हादसों पर एक नजर:

1. विकासनगर मिनी स्टेडियम झुग्गी कांड (अप्रैल 2026) – हालिया बड़ी त्रासदी

अभी महज दो महीने पहले ही विकासनगर में मिनी स्टेडियम के पास स्थित झुग्गी बस्ती में दोपहर के वक्त काल बनकर आग आई थी। सिलेंडर ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट के बाद चली तेज हवाओं ने आग को इतना विकराल बना दिया कि देखते ही देखते करीब 200 से अधिक झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। यह लखनऊ के सबसे दर्दनाक हादसों में से एक था, जिसमें 2 मासूम बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी और सैकड़ों गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए थे।

2. विकासनगर का ‘सेक्रेड मार्ट’ अग्निकांड (23 मार्च 2024)

विकासनगर के सेक्टर-4 में स्थित ‘सेक्रेड मार्ट’ (डिपार्टमेंटल स्टोर) और उसके बेसमेंट में बने कपड़ों के शोरूम में तड़के सुबह भीषण आग लग गई थी। घने रिहायशी इलाके में बनी इस तीन मंजिला इमारत के ऊपरी हिस्से में रहने वाले परिवारों के 10-12 लोग अंदर ही फंस गए थे। फायर ब्रिगेड ने क्रेन की मदद से दीवार और शीशे तोड़कर मासूम बच्चों सहित सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन मार्ट में रखा करोड़ों रुपये का सामान जलकर पूरी तरह स्वाहा हो गया था।

3. लेवाना सुइट्स होटल कांड (5 सितंबर 2022) – हजरतगंज

हजरतगंज के सबसे वीआईपी और पॉश मदन मोहन मालवीय मार्ग पर स्थित 4-मंजिला आलीशान होटल ‘लेवाना सुइट्स’ में सुबह के वक्त लगी आग ने पूरे देश को चौंका दिया था। उचित वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) न होने के कारण यह आलीशान होटल पल भर में गैस चैंबर बन गया था। इस दर्दनाक हादसे में 4 लोगों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई थी, जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

4. शताब्दी फेज-2 और KGMU ट्रॉमा सेंटर (2021 और 2017) – चौक

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर ने दो बार बड़े अग्निकांडों का दंश झेला है। साल 2021 में शताब्दी फेज-2 के वेंटिलेशन और केबल डक्ट में आग फैलने से हड़कंप मच गया था। वहीं, इससे पहले 16 अप्रैल 2017 को सबसे दर्दनाक हादसा ट्रॉमा सेंटर के दूसरे और तीसरे फ्लोर पर हुआ था। उस समय ऑक्सीजन सपोर्ट हटने और मरीजों को शिफ्ट करने की अफरा-तफरी के कारण नवजात शिशुओं सहित 6 गंभीर मरीजों ने दम तोड़ दिया था। इन हादसों में सरकार को करोड़ों के हाई-टेक वेंटिलेटर्स और एसी प्लांट का नुकसान भी हुआ था।

5. विराट और एसएसजे इंटरनेशनल होटल हादसा (18 जून 2018) – चारबाग

चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने बेहद संकरी गली में बिना फायर एनओसी (NOC) के सटकर बने दो होटलों में तड़के सुबह अचानक आग भड़क उठी थी। होटलों में फंसे यात्रियों को बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं मिला। इस भीषण और डरावने अग्निकांड में महिलाएं और बच्चों समेत 7 पर्यटकों की जिंदा जलकर और दम घुटने से मौत हो गई थी, जिसके बाद दोनों होटल खंडहर में तब्दील हो गए थे।

6. एफआईएस (FIS) कंप्यूटर इंस्टीट्यूट हादसा (16 मई 2015) – राजाजीपुरम

राजाजीपुरम के ई-ब्लॉक में स्थित एक कंप्यूटर ट्रेनिंग और ऑनलाइन परीक्षा केंद्र में यह हादसा हुआ था। एक साथ 100 से अधिक कंप्यूटर और एसी चालू होने के कारण ओवरलोडिंग से जबरदस्त शॉर्ट सर्किट हुआ। इस हादसे में 7 छात्र गंभीर रूप से झुलस गए थे और लगभग 25 छात्र अंदर ही काले धुएं के बीच फंस गए थे। इस अग्निकांड में लाखों का कंप्यूटर सिस्टम और कोचिंग का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर जलकर राख हो गया था।

इन तमाम बड़े हादसों के बाद भी सिस्टम ने कोई सबक नहीं लिया और आज उसी का नतीजा अलीगंज का यह नया अग्निकांड है।

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