जामताड़ा/रांची। झारखंड के अपराध जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। पलामू समेत राज्य के आधा दर्जन से अधिक जिलों में आतंक का पर्याय बन चुका कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। 75 से अधिक संगीन मामलों में आरोपी सुजीत सिन्हा साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था, तभी जामताड़ा के सुपायडीह हाईवे के पास यह सनसनीखेज वारदात हुई।
पंचर हुआ कैदी वाहन और फिर शुरू हुआ खूनी ड्रामा
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक साहिबगंज जेल से धनबाद ले जाए जाने के दौरान जामताड़ा जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित सुपायडीह हाईवे पर पुलिस का कैदी वाहन अचानक पंचर हो गया। सुरक्षाकर्मियों ने कड़ी चौकसी के बीच उसे दूसरे वाहन में शिफ्ट करना शुरू किया। इसी बीच मौका देखकर सुजीत सिन्हा ने एक पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल छीन ली और ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए भागने का प्रयास किया। पुलिस टीम ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसमें सुजीत सिन्हा मौके पर ही ढेर हो गया। घटना के बाद से पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
2007 के चर्चित डबल मर्डर से शुरू हुआ था खौफ का साम्राज्य
मूल रूप से पलामू जिले का रहने वाला सुजीत सिन्हा पहली बार वर्ष 2007 में सुर्खियों में आया था। पलामू के टाउन थाना क्षेत्र में टेंडर विवाद को लेकर हुए भूषण सिंह और अनिल सिंह के चर्चित दोहरे हत्याकांड में सुजीत का नाम मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आया था। इस वारदात के बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और रंगदारी, हत्या, आगजनी व अवैध वसूली के जरिए अपना विशाल आपराधिक नेटवर्क खड़ा कर लिया। वर्ष 2019 में अदालत ने उसे दोहरे हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
जेल के भीतर से चलाता था गैंग, पत्नी भी है चाईबासा जेल में बंद
सुजीत सिन्हा का खौफ इस कदर था कि जेल की ऊंची दीवारें भी उसके नेटवर्क को नहीं तोड़ सकीं। वह सलाखों के पीछे रहकर भी अपने गुर्गों के जरिए कारोबारियों से मोटी रंगदारी वसूलता था। सुरक्षा कारणों से उसे एक दर्जन से ज्यादा बार अलग-अलग जेलों में ट्रांसफर किया गया, लेकिन उसका सिंडिकेट सक्रिय रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार उसकी पत्नी रिया सिन्हा भी इस काले कारोबार में बराबर की साझेदार थी, जो फिलहाल चाईबासा जेल में बंद है।
पाकिस्तान, यूएई और ड्रोन कनेक्शन: टेरर फंडिंग का बड़ा खुलासा
जांच में सुजीत सिन्हा गैंग का संपर्क राज्य के अन्य कुख्यात अपराधियों जैसे अमन साहू और प्रिंस खान गिरोह से होने की बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि झारखंड के कारोबारियों से वसूली गई रंगदारी की रकम प्रिंस खान के जरिए यूएई भेजी जाती थी और वहां से इसे पाकिस्तान रूट किया जाता था। इस पैसे का इस्तेमाल अवैध हथियार खरीदने में होता था, जिन्हें ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा से भारत लाकर आपराधिक वारदातों में इस्तेमाल किया जाता था।
डेढ़ साल में दो बड़े गैंगस्टरों का अंत
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 11 मार्च 2025 को कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू भी रायपुर जेल से रांची लाते समय पलामू के चैनपुर इलाके में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। अमन साहू के बाद अब सुजीत सिन्हा के अंत से झारखंड में संगठित अपराध को बड़ा झटका लगा है। फिलहाल नियमानुसार पूरे एनकाउंटर मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।











