शाहजहांपुर। खाकी वर्दी पहनने और पुलिस महकमे में सेवा करने का सपना तो हर युवा देखता है, लेकिन कुछ लोग पहली ही तैनाती में ऐसी गलती कर बैठते हैं जिसकी भरपाई पूरी जिंदगी नहीं हो पाती। शाहजहांपुर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस विभाग में भर्ती हुए महज डेढ़ महीने के एक नए नवेले सिपाही को रिश्वतखोरी के चक्कर में अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। पहली पोस्टिंग, पहली बड़ी गलती और सीधे बर्खास्तगी की इस कार्रवाई ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
डेढ़ महीने पहले ही सिला था खाकी का चोला
मिली जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर जिले के शिकारपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव शिवनगर धूंसरी का रहने वाला 33 वर्षीय विवेक कुमार जून 2025 में बड़े अरमानों के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में भर्ती हुआ था। ट्रेनिंग सेंटर में कड़ा प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उसे पहली बार 24 अप्रैल 2026 को शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने में तैनाती मिली। विवेक अभी परिवीक्षा काल (प्रॉबेशन पीरियड) में ही था और अपनी तेजतर्रार कार्यशैली के कारण जैतीपुर थाना प्रभारी अश्विनी कुमार का हमराही (बॉडीगार्ड) बनकर साथ घूम रहा था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस खाकी को पाने के लिए उसने सालों मेहनत की, उसे वह इतनी जल्दी दागदार कर देगा।
एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल, थाना परिसर में ही 35 हजार लेते रंगे हाथ दबोचा
शुरुआती जांच और घटनाक्रम के मुताबिक, यह पूरा मामला 12 जून का है जब जैतीपुर इलाके में हत्या के एक गंभीर मामले में नामजद आरोपी से मामला रफा-दफा करने के एवज में मोटी रकम की मांग की जा रही थी। पीड़ित की शिकायत पर सतर्कता बरतते हुए एंटी करप्शन की टीम ने जैतीपुर थाना परिसर में ही अपना जाल बिछाया। जैसे ही सिपाही विवेक कुमार ने आरोपी से 35 हजार रुपये की रिश्वत की गड्डी अपने हाथ में थामी, वैसे ही एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। थाना परिसर के भीतर हुई इस छापेमारी से वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। इसके बाद आरोपी सिपाही के खिलाफ गढ़ियारंगीन थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया और कोर्ट में पेश करने के बाद उसे सीधे जेल भेज दिया गया।
कप्तान की बड़ी कार्रवाई: सीओ सिटी की जांच रिपोर्ट आते ही सिपाही की सेवा समाप्त
इस शर्मनाक घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सौरभ दीक्षित ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने सबसे पहले जैतीपुर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार को सस्पेंड कर लाइन हाजिर किया, क्योंकि आरोपी सिपाही उनका हमराही था। इसके बाद पूरे मामले की विभागीय और निष्पक्ष जांच की कमान सीओ सिटी पंकज पंत को सौंपी गई। सीओ सिटी ने मामले की गहराई से पड़ताल की और सिपाही विवेक कुमार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह सही पाया। बुधवार को जैसे ही जांच रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक के टेबल पर पहुंची, एसपी सौरभ दीक्षित ने बिना कोई देरी किए आरोपी सिपाही विवेक कुमार को सेवा से बर्खास्त करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया। एसपी ने साफ लफ्जों में कहा कि खाकी में रहकर भ्रष्टाचार करने वालों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। महज 45 दिनों के भीतर एक सिपाही की नौकरी जाने का यह मामला आज पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।













