
नई दिल्ली । परमाणु वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों अपने बुलेटिन में इसको लेकर गंभीर चेतावनी दी है। विश्व में तबाही का संकेत देने वाली घड़ी ‘डूम्सडे क्लॉक’ को आधी रात 90 सेंकेंड पर सेट किया गया है। दुनिया में तबाही का संकेत देने वाली घड़ी ‘डूम्सडे क्लॉक’ में 10 सेंकेंड कम कर दिए हैं। इस घड़ी में मध्य रात्रि के 12 बजने का मतलब है कि विश्व का अंत हो जाएगा। बता दें कि यह 3 साल में पहली बार किया गया है।
बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स द्वारा इस कयामत की घड़ी में समय सेट किया जाता है।डूम्सडे क्लॉक साल 2022 से आधी रात को 100 सेंकेंड पर सैट की गई थी। अब इसमें 10 सेकेंड कम कर दिए गए हैं, जो विश्व के लिए बड़े खतरे का संकेत है। मीडिया के अनुसार बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के सीईओ राहेल ब्रोंसन ने कहा कि अभी हम गंभीर खतरे के समय में जी रहे हैं और डूम्सडे क्लॉक का समय इसी वास्तविकता को दर्शाता है। तबाही के लिए जो समय निर्धारित किया गया है, उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। अब कयामत का समय यानी आधी रात (रात 12 बजे से ) सिर्फ 90 सेंकेंड दूर है। इस घड़ी में आधी रात 12 बजने का मतलब है कि दुनिया समाप्त हो जाएगी। इस घड़ी में आधी रात होने में जितना कम समय रहेगा, दुनिया में परमाणु युद्ध होने का खतरा उतना ही करीब होगा। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को देखते हुए वैज्ञानिकों ने परमाणु हमले की आशंका जताई है और महाविनाश के लिए सिर्फ 90 सेकेंड का समय सेट किया है। अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में वैज्ञानिकों ने बताया कि तबाही के कगार पर दुनिया खड़ी है। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने इस दौरान बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध, कोरोना महामारी, जलवायु संकट और जैविक खतरा सबसे बड़ा संकट बना हुआ है।













