
बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तटों पर बने डिप्रेशन सिस्टम के कारण देश के कई राज्यों में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर से तेज हो गई हैं. मौसम विभाग के अनुसार, इस नए मौसमी तंत्र का असर मध्य प्रदेश और राजस्थान में सोमवार से देखने को मिलेगा. राजस्थान के भरतपुर, जयपुर, कोटा, अजमेर और उदयपुर संभाग के करीब 10 जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया गया है.
मध्य प्रदेश के 55 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश में 27 से 30 जुलाई के दौरान कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का अनुमान है. सोमवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन और रीवा समेत प्रदेश के लगभग 55 जिलों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में राज्य में अब तक 13.2 इंच (334.9 मिमी) औसत बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश (15.5 इंच) की तुलना में करीब 15 प्रतिशत कम है.

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अलर्ट, नदियां खतरे के निशान के पार
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. विशेष रूप से लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. प्रदेश के 40 से अधिक शहरों में सुबह से ही बादलों का डेरा है. घाघरा और शारदा सहित राज्य की 4 प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. खराब मौसम और कम दृश्यता के चलते काठमांडू जा रही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को लखनऊ की ओर डायवर्ट करना पड़ा.
हिमाचल में 135 सड़कें ठप, गुजरात में सेना ने मोर्चा संभाला
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर जारी है. 30 जून से 26 जुलाई के बीच बारिश से जुड़ी घटनाओं में 15 लोगों की जान जा चुकी है. लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कुल्लू, शिमला और मंडी जिलों में स्थिति गंभीर है और राज्य की 135 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं. वहीं गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में मूसलाधार बारिश के बाद जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए भारतीय सेना ने राहत अभियान चलाया है, जिसके तहत पिछले तीन दिनों में 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.













