देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर – SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को एक अहम प्रस्ताव भेजा है. महाराष्ट्र के सीईओ ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि ‘फॉर्म-6’ (Form 6) में जरूरी बदलाव किए जाएं, ताकि उन मतदाताओं को बड़ी राहत मिल सके जिनके नाम एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से कट गए थे. अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोबारा नाम जुड़वाने वाले नागरिकों को ‘पहली बार मतदाता’ होने की झूठी घोषणा न करनी पड़े.
क्या है पूरा मामला और क्यों पैदा हुआ विवाद?
वर्तमान व्यवस्था के तहत, जब कोई व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरता है, तो उसमें यह घोषणा करनी होती है कि आवेदक ‘पहली बार’ मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा रहा है. फॉर्म में यह प्रावधान हाल ही में जोड़ा गया था.
लेकिन एसआईआर (SIR) अभियान के दौरान जिन लोगों के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए थे, वे दोबारा आवेदन करने से डर रहे हैं. इसका कारण यह है कि फॉर्म में दी जाने वाली गलत या झूठी घोषणा के मामले में कानूनी रूप से एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. इस तकनीकी पेंच और आम जनता में फैली असमंजस की स्थिति को देखते हुए ही महाराष्ट्र के सीईओ कार्यालय ने चुनाव आयोग को यह विशेष प्रस्ताव भेजा है.
फॉर्म-6 में मुख्य रूप से कौन-से 3 बदलाव चाहते हैं अधिकारी?
महाराष्ट्र के सीईओ द्वारा चुनाव आयोग को भेजे गए प्रस्ताव में मुख्य रूप से तीन बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है:
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शीर्षक में बदलाव: ‘फॉर्म-6’ के मुख्य शीर्षक से ‘नए मतदाता’ (New Voter) शब्द को हटाया जाए.
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वैकल्पिक घोषणा का प्रावधान: ऐसे लोगों के लिए एक अलग और वैकल्पिक घोषणा पत्र का विकल्प जोड़ा जाए, जो पहले किसी विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत थे, लेकिन वर्तमान में सूची में नहीं हैं और दोबारा अपना नाम शामिल कराना चाहते हैं.
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पुराना EPIC नंबर देने की छूट: फॉर्म में आवेदकों को अपना पुराना वोटर आईडी कार्ड (EPIC) नंबर दर्ज करने की अनुमति दी जाए, जिससे चुनाव अधिकारियों को उनके पुराने पंजीकरण और डेटा को ट्रैक करने में आसानी हो सके.
मतदाताओं को मिलेगी बड़ी राहत
यदि निर्वाचन आयोग महाराष्ट्र के सीईओ के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है, तो उन लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सूची से बाहर हो गए थे. इसके बाद वे बिना किसी कानूनी डर या भ्रामक घोषणा के आसानी से दोबारा मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकेंगे.


















