मोहसिन रजा बने उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के नए अध्यक्ष, मिलेगा कैबिनेट मंत्री का दर्जा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख मुस्लिम चेहरे मोहसिन रजा की भूमिका एक बार फिर बेहद अहम हो गई है। प्रदेश सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही सरकार की ओर से उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्रदान किया जाएगा। बता दें कि मोहसिन रजा इससे पहले योगी सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज विभाग में राज्य मंत्री का पद संभाल चुके हैं।

वक्फ संपत्तियों में गड़बड़ी और SIT जांच की उठाई थी मांग

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष का पद संभालने से कुछ समय पहले ही मोहसिन रजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में मौजूद वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में हो रही कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। रजा ने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि दोनों (शिया और सुन्नी) वक्फ बोर्डों की संपत्तियों की जिला स्तर पर विशेष एसआईटी (SIT) जांच और स्पेशल ऑडिट कराया जाना चाहिए।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान सही ऑडिट न होने की वजह से रिकॉर्ड में दर्ज करीब 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड वक्फ संपत्तियों में से 70 हजार से ज्यादा संपत्तियां या तो गायब हो गईं या उन पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्जे कर लिए।

रणजी ट्रॉफी से राजनीति तक: ऐसा रहा है सफर

मोहसिन रजा का पहचान का दायरा केवल सियासत तक सीमित नहीं है। राजनीति में आने से पहले वे एक खिलाड़ी, मॉडल और अभिनेता के रूप में भी जाने जाते थे।

  • क्रिकेट करियर: मोहसिन रजा प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के लिए ‘रणजी ट्रॉफी’ खेल चुके हैं।

  • ग्लैमर वर्ल्ड: वे 1995 में ‘प्रिंस लखनऊ’ चुने गए थे और उन्होंने प्रसिद्ध धारावाहिक ‘नीम का पेड़’ सहित कई अभिनय प्रोजेक्ट्स और मॉडलिंग में काम किया है।

  • राजनीतिक पारी: साल 2013-14 में लोकसभा चुनाव से पहले रजा भाजपा में शामिल हुए थे और बाद में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता बने। 2017 में बीजेपी की सरकार बनने पर वे योगी कैबिनेट में शामिल एकमात्र मुस्लिम मंत्री चेहरा बने और यूपी विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी निर्वाचित हुए।

अब अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर तैनाती के साथ ही राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण, विकास और वक्फ सुधारों को लेकर उनकी भूमिका काफी प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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