अयोध्या। अयोध्या में भगवान श्री रामलला के भव्य और दिव्य मंदिर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इन दिनों एक ऐसे अप्रत्याशित विवाद के केंद्र में आ गई है, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राम मंदिर में चढ़ावे (दान) की भारी-भरकम राशि की गिनती को लेकर उठे गंभीर सवाल और कर्मचारियों पर लगे गबन (चोरी) के कथित आरोपों के बीच अब यह हाई-प्रोफाइल मामला विशेष जांच दल (SIT) के हाथों में पहुंच चुका है। एसआईटी की टीम के अयोध्या पहुंचने से ठीक पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस पूरे विवाद पर पहली बार आधिकारिक और बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रस्ट ने बेहद कड़े शब्दों में साफ किया है कि उसे इस उच्च स्तरीय जांच से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि उसने स्वयं आगे बढ़कर सरकार से इस स्वतंत्र जांच की मांग की थी ताकि राम भक्तों के मन में उठ रहे हर एक सवाल का दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
ट्रस्ट के महासचिव ने खुद की थी मांग, महज 15 घंटे के भीतर बैठी हाई-लेवल SIT
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी राव ने इस संवेदनशील मामले पर आधिकारिक बयान देते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से ट्रस्ट और संबंधित बैंकों के स्तर पर वार्षिक ऑडिट की नियमित प्रक्रिया चल रही थी। इसी ऑडिट के दौरान कई वित्तीय विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद तरह-तरह की बातें और भ्रम की स्थिति पैदा होने लगी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट का प्रबंधन चाहता था कि पूरे मामले की बिल्कुल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो ताकि रामलला के खजाने को लेकर जनता में कोई संशय न रहे। इसी उद्देश्य से ट्रस्ट के महासचिव ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का लिखित अनुरोध किया था। गोपाल जी राव के मुताबिक, शासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रिकॉर्ड तेजी दिखाई और मात्र 15 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन कर दिया। ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया है कि वह जांच एजेंसियों को हर वित्तीय दस्तावेज और संभव सहयोग देगा।
गिनती करने वाला मुख्य कर्मचारी हिरासत में, पूछताछ में उगल रहे राज
इस बड़े वित्तीय घोटाले की परतें खोलने के लिए जांच एजेंसियों ने धरातल पर कड़ा एक्शन शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि की गिनती (कैश काउंटिंग) से जुड़े मुख्य कर्मचारी लवकुश मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम उससे किसी अज्ञात सुरक्षित ठिकाने पर लगातार कड़ी पूछताछ कर रही है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि छापेमारी के दौरान आरोपी कर्मचारी के पैतृक घर से करीब 10 लाख रुपये की भारी नकदी बरामद होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। अब यह बड़ी रकम कहां से आई, इसका असली स्रोत क्या है और क्या यह रामलला के चढ़ावे का हिस्सा है, यही इस वक्त जांच का सबसे मुख्य और अहम विषय बना हुआ है। हालांकि, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अभी तक इस बरामद धनराशि को लेकर कोई भी आधिकारिक या अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
अलमारी ही नहीं, गोबर के ढेर में भी छिपाकर रखे गए थे नोटों के बंडल
स्थानीय ग्रामीणों और खुफिया सूत्रों के हवाले से जो जानकारियां सामने आ रही हैं, वे बेहद हैरान और स्तब्ध करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी कर्मचारी के घर और आसपास चलाए गए गहन तलाशी अभियान (रेड) के दौरान नकदी को बेहद शातिराना तरीके से अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखा गया था। कुछ रकम तो घर के अंदर अलमारी के गुप्त खानों में मिली, जबकि नोटों की कुछ गड्डियों को कथित तौर पर घर के बाहर बने गोबर के ढेर के भीतर पॉलीथिन में लपेटकर छिपाया गया था।
गोबर के ढेर से लक्ष्मी निकलने की यह खबर सोशल मीडिया से लेकर अयोध्या की गलियों तक आग की तरह फैल गई है। इस मामले में जांच की आंच केवल एक शख्स तक सीमित नहीं है, बल्कि चढ़ावे की गिनती के काम में लगे एक अन्य सह-कर्मचारी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की खबर है। जांचकर्ताओं का मानना है कि किसी भी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले मंदिर के पिछले कई महीनों के वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों और आरोपियों की निजी संपत्ति के विवरण का बारीकी से मिलान करना आवश्यक है।
पिता का भावुक बचाव: बोले- बेटा निर्दोष है, मकान के लिए गिरवी रखी थी खेती की जमीन
इस बीच, मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल अपने बेटे के बचाव में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने अपने बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप राजनीति से प्रेरित और झूठे हैं, जिसकी सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद सामने आ जाएगी। पिता ने यह बात जरूर स्वीकार की कि जांच टीम को उनके घर से कुछ नकदी मिली है, लेकिन उन्होंने फैजाबाद (अयोध्या शहर) में बन रहे एक आलीशान निर्माणाधीन मकान से अपने बेटे का कोई भी संबंध होने से साफ इनकार किया। परिजनों ने बड़ा दावा किया है कि घर में मिली नकदी और मकान निर्माण के लिए उन्होंने अपनी कृषि भूमि (खेती की जमीन) को गिरवी रखा था और उसी से इस धन की व्यवस्था हुई थी। अब एसआईटी और पुलिस की टीमें जमीन गिरवी रखने के इन दावों के कानूनी दस्तावेजों की भी गहनता से पड़ताल कर रही हैं।
आईएएस विजय विश्वास पंत की अगुवाई में जांच, 15 दिनों में देनी होगी अंतिम रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले को सुलझाने और दोषियों को बेनकाब करने के लिए जो तीन सदस्यीय एसआईटी टीम बनाई है, उसकी कमान लखनऊ मंडल के कमिश्नर (आयुक्त) वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है। इस हाई-प्रोफाइल टीम में तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशानुसार, एसआईटी को आगामी सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी। इसके साथ ही, पूरे मामले की विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट (Final Report) देने के लिए 15 दिनों की सख्त समयसीमा तय की गई है। माना जा रहा है कि आने वाले 48 घंटों में इस जांच में कई और चौंकाने वाले चेहरे और वित्तीय खुलासे सामने आ सकते हैं।













