अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी और चोरी के मामले में अब पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद, राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर न केवल पहली एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, बल्कि पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी आठों नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट आते ही हिला महकमा, सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
दरअसल, राम मंदिर में चढ़ावे की रकम के गबन की शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत की अगुवाई में टीम ने लगातार 6 दिनों तक मंदिर का दौरा किया और पांच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की। इस दौरान जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो कुछ कर्मचारी सीधे तौर पर चढ़ावे की रकम से चोरी करते हुए कैमरे में कैद पाए गए। मंगलवार को जैसे ही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी, सीएम ने साफ शब्दों में कह दिया कि ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इसके तुरंत बाद गुरुवार शाम को एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी गई।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्ज कराया केस, इन 8 लोगों पर गिरी गाज
यह ऐतिहासिक और पहली एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज कराई गई है। इस एफआईआर में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है, जिनका सीधा संबंध कैश के रखरखाव और गिनती से था।
FIR में नामजद मुख्य आरोपी:
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रमाकांत यादव उर्फ टिन्नू यादव
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लवकुश मिश्रा (गिरफ्तार)
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अनुकल्प मिश्रा (गिरफ्तार)
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अविनाश शुक्ला
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मनीष यादव
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रमाशंकर मिश्र
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सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
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करुणेश पांडे
नोट: इस एफआईआर में कुछ अज्ञात लोगों को भी शामिल किया गया है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम इसमें शामिल नहीं है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की इन 6 कड़क धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बेहद सख्त और गंभीर धाराएं लगाई हैं, जिनमें दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है:
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धारा 3(5): जब कई लोग एक ही कॉमन इंटेंशन (साझा मकसद) के साथ मिलकर कोई अपराध करते हैं, तो हर व्यक्ति बराबर का दोषी माना जाता है।
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धारा 61: आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रचना, यानी दो या अधिक लोगों का गैर-कानूनी काम के लिए सहमत होना।
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धारा 306: किसी मालिक या नियोक्ता के अधीन काम करने वाले क्लर्क या नौकर द्वारा संपत्ति की चोरी करना (7 साल तक की जेल)।
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धारा 316 (5): लोक सेवक, बैंकर, एजेंट या कस्टोडियन के रूप में सौंपी गई संपत्ति पर आपराधिक विश्वासघात करना (आजीवन कारावास या 10 साल की जेल)।
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धारा 317 (4): आदतन चोरी की संपत्ति का लेन-देन या उसे प्राप्त करना (आजीवन कारावास या 10 साल की जेल)।
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धारा 317 (5): चोरी की संपत्ति को जानबूझकर छिपाने या ठिकाने लगाने में मदद करना (3 साल तक की जेल या जुर्माना)।
राम मंदिर परिसर में बदली व्यवस्था, अब बैंक के अधिकारी करेंगे क्रॉस वेरिफिकेशन
इस बड़े खुलासे और फजीहत के बाद राम मंदिर परिसर में दान राशि के कलेक्शन और काउंटिंग (गिनती) को लेकर नियमों को बेहद कड़ा और पारदर्शी कर दिया गया है। जिन पुराने कर्मचारियों पर पहले यह जिम्मेदारी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर दूसरे विभागों में भेज दिया गया है। अब कैश काउंटिंग रूम में मंदिर के बेहद विश्वसनीय स्टाफ के साथ-साथ सीधे बैंक के नए अधिकारियों को तैनात किया गया है।
इतना ही नहीं, पैसों की गिनती वाले पूरे क्षेत्र की निगरानी के लिए एक नया और आधुनिक सीसीटीवी कैमरा सिस्टम लगाया गया है, जिसका एक अलग स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया गया है। अब काउंटिंग रूम में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले हर कर्मचारी की 100% गहन तलाशी ली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, अब बैंक में कैश जमा करते समय तीन अलग-अलग अधिकारी क्रॉस वेरिफिकेशन करेंगे और तीनों के हस्ताक्षर होने के बाद ही प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी, ताकि भविष्य में हेराफेरी की कोई गुंजाइश न बचे।














