विनायक राऊत के परिवार पर काला जादू का संगीन आरोप: बहू की शिकायत पर सिंधुदुर्ग से तांत्रिक गिरफ्तार, गोमूत्र पिलाने और बाल उखाड़ने का दावा

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के पूर्व सांसद विनायक राऊत, उनके बेटे गितेश राऊत और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामले में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। ठाणे की कापूरबावड़ी पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल केस में नामजद कथित तांत्रिक फिरोज शेख को कोंकण सिंधुदुर्ग के कुडाळ इलाके से धर दबोचा है। पुलिस आज दोपहर ही आरोपी तांत्रिक को ठाणे कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है। यह पूरी कानूनी कार्रवाई विनायक राऊत की बहू गिरिजा राऊत की ओर से दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के बाद अमल में लाई गई है।

पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ‘महाराष्ट्र नरबलि एवं अन्य अमानवीय, अनिष्ट तथा अघोरी प्रथा एवं काला जादू प्रतिबंध अधिनियम’ सहित आईपीसी/बीएनएस की कई अन्य गंभीर धाराओं के तहत कुल सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस वीआईपी परिवार से जुड़े मामले के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।

शादी के बाद से ही शुरू हो गया था अघोरी प्रथाओं का खौफनाक खेल

गिरिजा राऊत ने पुलिस को दिए अपने बयानों में ससुराल वालों पर बेहद चौंकाने वाले और संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2017 में विनायक राऊत के बेटे गितेश राऊत से विवाह बंधन में बंधने के बाद से ही उन्हें लगातार मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता का दावा है कि साल 2018 के बाद से उनके और उनके पति के बीच किसी भी तरह के वैवाहिक शारीरिक संबंध नहीं रहे। इसके बावजूद, संतान प्राप्ति का झांसा देकर और अंधविश्वास के जाल में फंसाकर उन्हें जबरन अलग-अलग कथित तांत्रिकों के पास ले जाया गया, जहां उनके ऊपर अघोरी और डरावने अनुष्ठान कराए गए।

सिर के बाल उखाड़े और जबरन पिलाया गोमूत्र

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन पर किए गए कथित तांत्रिक अनुष्ठानों के दौरान क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। तांत्रिकों के इशारे पर उनके सिर के बाल बेरहमी से उखाड़े गए, उन्हें न जाने कौन-कौन सी अज्ञात दवाइयां दी गईं और जबरन गोमूत्र व अन्य अवांछित पदार्थ पीने के लिए मजबूर किया गया। गिरिजा का आरोप है कि यह सब कुछ उनकी मर्जी और मर्जी के खिलाफ डरा-धमका कर किया जाता था, जिसने उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ससुर विनायक राऊत उनके साथ उस मकान में नहीं रहते थे, बल्कि वह और उनके पति एक छोटे से घर में रहते थे, जहां उन्हें एक सामान्य वैवाहिक जीवन तक नसीब नहीं हुआ।

वकील की मांग: पूर्व सांसद विनायक राऊत समेत सभी आरोपियों की हो तुरंत गिरफ्तारी

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता की ओर से कोर्ट में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सागर कदम ने मीडिया से बात करते हुए तथ्यों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि यह कोई आम घरेलू हिंसा या प्रताड़ना का मामला नहीं है, बल्कि यह अंधविश्वास, अघोरी प्रथाओं और महिला के बुनियादी अधिकारों के हनन का एक बेहद गंभीर और संवेदनशील केस है।

अधिवक्ता ने जोर देकर कहा कि एफआईआर में लगाई गई धाराएं गैर-जमानती (Non-bailable) हैं, इसलिए कानूनन पूर्व सांसद विनायक राऊत सहित इस मामले में नामजद सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस अंधविश्वास के खेल के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क और अन्य संबंधित किरदारों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जाए।

उधर, कापूरबावड़ी पुलिस स्टेशन के अधिकारियों का कहना है कि मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। तफ्तीश के सिलसिले में जब राऊत परिवार से संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस अब गिरफ्तार तांत्रिक से पूछताछ कर मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment