
नई दिल्ली। देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून लागू करने जा रही है। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पर लोकसभा में चर्चा का रास्ता साफ हो गया है। संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के भारी हंगामे और कार्यवाही स्थगित होने के बीच इस अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा शुरू करने पर सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बन गई है।
स्पीकर ओम बिरला की पहल से बनी बात, चर्चा के लिए 6 घंटे तय
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से की गई विशेष पहल के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच यह गतिरोध समाप्त हुआ। ओम बिरला ने विभिन्न राजनीतिक दलों के floor leaders के साथ बैठक कर आम सहमति बनाई। देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और व्यापक सुधार के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए स्पीकर ने विधेयक पर विस्तृत बहस के लिए 6 घंटे का समय आवंटित करने की पेशकश की है।
संगठित परीक्षा माफियाओं और नकल गिरोहों पर कड़ा प्रहार
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और युवाओं के आक्रोश को ध्यान में रखते हुए इस संशोधन विधेयक को लाया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, सुनियोजित पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और परीक्षा माफियाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। इस कानून के लागू होने के बाद मुन्नाभाइयों और माफियाओं के लिए बच निकलना नामुमकिन हो जाएगा।
संशोधन विधेयक में दस गुना तक बढ़ी सजा, फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान
नए संशोधन विधेयक में सजा और जुर्माने के नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। व्यक्तिगत रूप से धोखाधड़ी में शामिल व्यक्तियों के लिए जेल की सजा को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल तक करने और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, संगठित अपराध (एग्जाम माफिया) के मामलों में न्यूनतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक करने तथा 10 करोड़ रुपये तक के भारी भरकम जुर्माने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं, मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
‘यह युवाओं के भविष्य का सवाल है’: रिजिजू की विपक्ष से अपील
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में विपक्ष से इस विधेयक पर सकारात्मक रुख अपनाने और चर्चा चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग पर चर्चा का समय और बढ़ाया जा सकता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कई विपक्षी सांसद भी इस विधेयक पर संशोधनों के साथ पूरी तैयारी से आए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कानून देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा है, इसलिए सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आकर इस पर अपने विचार रखने चाहिए।














