
कानपुर। केडीए अधिकारी को रिश्वत न देने पर उसने पीडित को परेशान करने के उद्देश्य से मूल आदेश प्रति का अनुपालन न करते हुए उसके स्थान पर एक फर्जी न्यायालय का आदेश बनाकर प्रस्तुत कर दिया साथ ही न्यायालय को गुमराह भी किया। इस बावत जब पीडित केडीए उपाध्यक्ष अरविंद सिंह के पास पहुंचा और सारा मामला बताया तो वह रिश्वत मांगने की बात पर बिफर पडे और पीडित को डपट कर कमरे से बाहर कर दिया।
आपको बता दे कि मामला पनकी के एक प्लांट 1068 बी पनकी कानपुर का है । जिसका न्यायालय द्वारा 21/11/ 1997 को पीडित लाजवन्ती सलूजा का मानचित्र स्वीकृत हुआ व उसमें मलवा चार्ज की अवैधानिक मांग को न्यायालय ने 30 सितम्बर, 2015 को मलवा चार्ज की मांग को निरस्त करते हुए मलवा चार्ज माफ कर मानचित्र को पीडित को एक माह के अन्दर देने आदेश दिया। लेकिन केडीए विभाग द्वारा नक्शा नही दिया गया।
पीडित ने आरोप लगाते हुए बताया कि केडीए अधिकारी ज्योति प्रसाद ने नक्शा देने के एवज में एक लाख रूपये की मांग की। पीडित ने जब न्यायालय के आदेश को दिखाया तो उसे ज्योति प्रसाद ने मानने से इंकार कर दिया और कहा कि अगर न्यायालय के चक्कर काटोगे तो नक्शा कभी भी नही मिल पाएगा।
इस बात को लेकर पीडित केडीए उपाध्यक्ष अरविन्द सिंह के पास पहुंची जहां पीडित लाजवन्ती सलूजा ने पूरी बात बताई। ज्याति प्रसाद द्वारा रिश्वत मांगे जाने की बात सुन कर उन्होंने कोई कार्यवाही तो छोडिए उलटा पीडत पर ही बिफर पडे और उसे कमरे से बाहर कर दिया। आज 25 साल बीत जाने के बाद भी पीडित बुर्जग को नक्शा नही दिया गया।
पीडित ने बताया कि जब एक बार नक्शा स्वीकृत हो जाए तो नक्शे को रिव्यू या पुनः स्वीकृत तथा कैंसिल नहीं कर सकते। नक्शा 1997 में स्वीकृत हुआ था जबकि मलवा चार्ज 2011 से लागू है जो मेरे ऊपर नहीं हो लागू होता है।










