
भास्कर समाचार सेवा
वृंदावन । जीएसटी विभाग द्वारा की जा रही छापेमारी से हो रहे व्यपारी उत्पीड़न को लेकर गुरुवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री आलोक बंसल,व्यापार मंडल के चेयरमैन धनेंद्र अग्रवाल बॉबी, महानगर अध्यक्ष जितेंद्र प्रजापति, जिला अध्यक्ष बलराम शर्मा पके नेतृत्व में ज्वाइंट कमिश्नर प्रीति शर्मा के जरिए भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल के चेयरमैन धनेंद्र अग्रवाल बॉबी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी 16 मई से 15 जून तक की जाने वाली जांच सर्वे में जीएसटी टीम की छापेमारी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न चरम सीमा पर है। कुछ समय पूर्व संपूर्ण उत्तर प्रदेश में जीएसटी अधिकारियों द्वारा लगातार सर्वे और छापेमारी की कार्रवाई की गई है। प्रत्येक माहनगर व नगर के विभिन्न सेक्टरों के अधिकारीयों एवं कर्मचारियों द्वारा व्यापारियों को फोन कर जीएसटी जांच के नाम पर धमका कर अवैध वसूली की जा रही है। चन्द फर्जी फर्मो को रोकने के लिए सभी व्यापारियों के यहां जांच सर्वे में छापेमारी की कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। फर्जी बिलिंग व फर्जी आधार कार्ड व अन्य कागजात लगाकर रजिस्ट्रेशन व कारोबार करना विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है।वही आलोक बंसल ने बताया कि संपूर्ण भारत वर्ष में हजारों की संख्या में सचल दस्ते काम कर रहे हैं, जो छोटी-छोटी टेक्निकल कमियों पर भी गाड़ियों को रोककर जुर्माने आदि की कार्रवाई करते हैं। जिससे स्पष्ट है, की फर्जी बिलिंग व बोगस फर्मो का कार्य विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नहीं चल सकता है। फर्म का रजिस्ट्रेशन कराते समय सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होते हैं। जिसकी स्कूटनी सॉफ्टवेयर में अधिकारियों द्वारा की जाती है। संपूर्ण जांच होने के बाद रजिस्ट्रेशन जारी किया जाता है। किसी भी कागज के स्पष्ट न होने पर कई कई बार पोर्टल द्वारा पुनः आवेदन कर्ता से स्पष्टीकरण मांगा जाता है। पूरे तरीके से सभी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्रेशन जारी किया जाता है। उसके बाद भी यदि बोगस फर्मो का रजिस्ट्रेशन हो रहा है,तो इसके लिए विभाग के पोर्टल का सॉफ्टवेयर या संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होने चाहिए। व्यापारियों के यहां छापेमारी के स्थान पर पोर्टल व अधिकारियों की कारगुजारी पर ध्यान देना अति आवश्यक है। फर्जी व बोगस फर्मो के पाए जाने पर रजिस्ट्रेशन जारी करने वाले अधिकारी के विरुद्ध भी जांच में कार्रवाई की जाए।













