
हरदा में जन्मे शुजालपुर का मास्टर दिव्यांश, मुंबई के निजी अस्पताल में सुबह 5.30 बजे भर्ती हुआ, दोपहर 12 बजे शुरू हो गई सर्जरी
शुजालपुर (ईएमएस)। हरदा के जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले शुजालपुर के 25 दिन के बच्चे की जान बचाने के लिए शाजापुर जिला प्रशासन ने गुड गवर्नेंस की अनूठी मिसाल पेश कर व्हाट्सएप पर बीमारी के दस्तावेज मंगा कर 4 घंटे में 1.80 लाख की सहायता स्वीकृत की। सोमवार सुबह 5:30 बजे मुंबई पहुंचे बच्चे की दोपहर 12 बजे हाई रिस्क सर्जरी शुरू कर दी गई, जो सफल रही।
हरदा के जिला अस्पताल में शुजालपुर निवासी नेहा राजपूत ने 18 अगस्त को बेटे को जन्म दिया। दिल में गंभीर बीमारी से बेटे को पहले दिन से ही ऑक्सीजन पर रखा गया। बच्चे के पिता वार्ड 16 शुजालपुर निवासी राहुल राजपूत को चिकित्सकों ने मध्य प्रदेश से बाहर बच्चे की तत्काल हार्ट सर्जरी कराने की जरूरत बताई। करीब 6 लाख रुपए से होने वाले ऑपरेशन के खर्च की व्यवस्था न होने पर पिता राहुल राजपूत ने शुजालपुर के निशुल्क रोजी सेवा केंद्र हेल्प फॉर यू के पुरुषोत्तम पारवानी व स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मदद मांगी। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे के दस्तावेज व्हाट्सएप पर मंगा कर जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम समन्वयक हिमांशी काले को 14 सितंबर को जमा किए। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ राजू निदारिया ने मुंबई के नारायण हृदयालय द्वारा संचालित एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल में 25 दिन के मास्टर दिव्यांश को ले जाने परिजनों को कहा व वहा पहुंचने पर निशुल्क सरकारी योजना में आपरेशन व्यवस्था का ढांढस बंधाया। शुक्रवार 15 सितंबर सुबह 5:30 बजे हरदा से एंबुलेंस द्वारा मुंबई पहुंचे मास्टर दिव्यांश की शुक्रवार को पहली जटिल सर्जरी की गई। जिला प्रशासन ने आरबीएसके कार्यक्रम के तहत मास्टर दिव्यांश की पहली सर्जरी के लिए 1 लाख 80 हजार 4 घंटे में स्वीकृत कर मुंबई के अस्पताल को स्वीकृति ईमेल के माध्यम से भेजी।
सामान्यतः यह है सहायता स्वीकृति का नियम…
सामन्यतः राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में किसी भी योजना में मरीज के परिजन को दस्तावेज जिला अस्पताल में लाकर भौतिक रूप से दिखाना होता है। उसके बाद मरीज का जिला अस्पताल में परीक्षण कर अस्पताल से मूल इस्तिमेट,जांचे लाने पर स्वीकृति जारी कर इलाज के लिए सहायता दी जाती है। लेकिन इस नन्हे बच्चे की जान बचाने के लिए जिला प्रशासन ने गुड गवर्नेंस का यह सराहनीय उदाहरण पेश किया।
पहले भी ई मेल से स्वीकृति दे चुका विभाग…
इससे पहले भी शाजापुर जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई बच्चों को गंभीर आपात स्थिति में सर्जरी करने के लिए ईमेल के माध्यम से ही देश के विभिन्न अस्पतालों को सहायता राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सर्जरी के बाद मास्टर दिव्यांश को अभी चिकित्सकों की गहन देखरेख में रखा गया है तथा कुछ दिन बाद दो अन्य सर्जरी भी इस बच्चे की होगी। आगे के इलाज के लिए स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने सीएम स्वेच्छा अनुदान से मदद कराने का आश्वासन परिजनों को दिया है।












