भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत: समंदर का नया ‘सिकंदर’ INS तारागिरी बेड़े में शामिल, चीन-पाक की उड़ेगी नींद

विशाखापट्टनम। भारतीय समुद्री सीमा की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में शुक्रवार को देश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित शक्तिशाली युद्धपोत आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। विशाखापट्टनम में आयोजित एक भव्य कमीशनिंग समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस युद्धपोत के शामिल होने से हिंद महासागर में भारत की पकड़ और भी मजबूत हो गई है।

रक्षा मंत्री बोले- ‘विकसित भारत’ के लिए समुद्री शक्ति अनिवार्य

कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से सुरक्षित समुद्री मार्गों पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को पूरा करने में नौसेना की भूमिका सबसे अहम होगी। राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर भारत का एक चमकता हुआ उदाहरण बताते हुए कहा कि अब हम केवल खरीदार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए बड़े रक्षा निर्माता बन रहे हैं।

प्रोजेक्ट 17A का ‘स्टील्थ’ योद्धा: रडार की नजर से बचेगा

आईएनएस तारागिरी ‘प्रोजेक्ट 17ए’ (Project 17A) के तहत निर्मित चौथा युद्धपोत है। इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है। लगभग 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टील्थ’ डिजाइन है, जिसकी वजह से यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता। यह दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला करने और वहां से सुरक्षित निकलने में पूरी तरह सक्षम है।

75% स्वदेशी तकनीक और MSMEs का दम

मेक इन इंडिया के तहत बना यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से लैस है। खास बात यह है कि इसके निर्माण में देश के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने अपना योगदान दिया है। इससे न केवल देश की सामरिक शक्ति बढ़ी है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। यह स्वदेशी युद्धपोत वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवा रहा है।

मिसाइलों और घातक हथियारों से है लैस

आईएनएस तारागिरी की मारक क्षमता इसे दुनिया के बेहतरीन युद्धपोतों की कतार में खड़ा करती है। इसमें संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली (CODOG) लगी है, जो इसे समुद्र में जबरदस्त गति और लंबी दूरी तय करने की शक्ति देती है। हथियारों की बात करें तो यह सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और उन्नत पनडुब्बी रोधी (Anti-Submarine) युद्ध प्रणालियों से लैस है। इसकी आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली किसी भी खतरे को भांपकर पलक झपकते ही उसे नेस्तनाबूद कर सकती है।

युद्ध ही नहीं, आपदा में भी बनेगा मददगार

आईएनएस तारागिरी केवल युद्ध लड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि संकट के समय इंसानी जान बचाने के लिए भी तैयार किया गया है। इसे मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) कार्यों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। चक्रवात या अन्य समुद्री आपदाओं के समय यह पोत राहत सामग्री पहुंचाने और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। नौसेना में इसकी एंट्री को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

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