उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रेजिडेंसी क्षेत्र में शनिवार की सुबह एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहाँ सीवर लाइन की सफाई करने उतरे पिता और पुत्र की जहरीली गैस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। करीब 20 फीट गहरे मौत के कुएं में दोनों दो घंटे तक फंसे रहे। जब तक उन्हें बाहर निकालकर ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर सीवर सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उतारा 20 फीट गहरे काल में
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक पिता-पुत्र एक निजी ठेकेदार के अधीन काम कर रहे थे। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर दोनों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गहरे सीवर में उतार दिया था। न तो उनके पास जहरीली गैस का पता लगाने वाला ‘गैस डिटेक्टर’ था और न ही आपात स्थिति के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर। यहाँ तक कि उन्हें सेफ्टी बेल्ट तक मुहैया नहीं कराई गई थी। सुरक्षा मानकों की यह बड़ी चूक ही उनकी मौत का कारण बनी।
नगर निगम का कड़ा रुख: ठेकेदार होगा ब्लैकलिस्ट, दर्ज होगी FIR
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और उसे भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसके साथ ही, पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा देने की घोषणा भी की गई है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या मुआवजे से उस परिवार की भरपाई हो पाएगी जिसने एक साथ अपने घर के दो चिराग खो दिए?
लखनऊ में हादसों का पुराना पैटर्न, महीने भर में दूसरी बड़ी घटना
राजधानी में सीवर सफाई के दौरान मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी पिछले महीने 8 मई 2026 को ही माल क्षेत्र में एक सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान रिंकू और राजेश नाम के दो मजदूरों की जहरीली गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई थी। हर हादसे में एक जैसा पैटर्न देखने को मिलता है—मजदूरों को बिना किसी तैयारी के उतार दिया जाता है। टैंकों के भीतर जमा मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें काल बनकर बैठी होती हैं। अक्सर एक साथी को बचाने के चक्कर में दूसरा भी नीचे उतरता है और वह भी हादसे का शिकार हो जाता है।
क्या कहता है कानून और क्यों नहीं रुक रही मौतें?
भारत में ‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013’ के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर या सेप्टिक टैंक में उतारना एक गंभीर अपराध है। कानून के उल्लंघन पर जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि ठेकेदार और संबंधित एजेंसियां कागजों पर नियम तो मानती हैं, लेकिन मौके पर मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं समझी जाती। नगर निगम अक्सर ठेकेदारों पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेता है, जबकि निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी विभाग की ही होती है।
नगर निगम की अपील: खुले मैनहोल की सूचना 1533 पर दें
हालिया हादसों से सबक लेते हुए नगर निगम ने अब सभी खुले नालों और मैनहोल को तत्काल ढकने के आदेश दिए हैं। विभाग ने 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी शुरू करने की बात कही है। साथ ही लखनऊ के नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें शहर में कहीं भी खुला मैनहोल या खतरनाक सीवर लाइन दिखे, तो तुरंत टोल फ्री नंबर 1533 पर सूचित करें ताकि किसी और बेगुनाह की जान न जाए।











