शामली। शामली के भभीसा गांव में करीब 12 साल पहले हुए पवन कुमार हत्याकांड में गुरुवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश एवं त्वरित न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए मामले में दोषी पाए गए चार अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई। मामला वर्ष 2014 में घर में घुसकर की गई अंधाधुंध गोलीबारी से जुड़ा है, जिसमें पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी।
घर में घुसकर की गई थी ताबड़तोड़ फायरिंग
अभियोजन के अनुसार, घटना 14 जुलाई 2014 की सुबह करीब 10:45 बजे हुई थी। वादी अशोक कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि हमलावर सफेद कार से बुढ़ाना-कांधला मार्ग की ओर से आए थे। इसके बाद आरोपी उनके घर में घुस गए और अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
फायरिंग में अशोक कुमार घायल हो गए, जबकि उनके भाई पवन कुमार को गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर कुल आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
चार आरोपियों पर दोष सिद्ध, कोर्ट ने सुनाई फांसी
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामले में चार आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध हुआ। इनमें पीरखेड़ा निवासी रामवीर, बड़ौत के रामनगर निवासी राजीव उर्फ छोटू, भभीसा निवासी राहुल उर्फ बोसी और कांजरहेड़ी निवासी हरेंद्र कुमार शामिल हैं।
गुरुवार को अदालत में सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश एवं त्वरित न्यायालय संख्या-3 ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।
एक आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया
अभियोजन प्रपत्रों के मुताबिक, मामले में भभीसा निवासी विपुल उर्फ खूनी, अशोक और भड़ल निवासी राहुल के खिलाफ भी विवेचना जारी रही थी। इनमें विपुल उर्फ खूनी बाद में बागपत में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारा गया था।
वहीं, एक अन्य आरोपी अमित पुत्र सत्यप्रकाश के फरार होने के कारण उसकी पत्रावली को अदालत ने 1 मार्च 2024 को अलग कर दिया था। उसके खिलाफ मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग से आगे बढ़ाई जा रही है।
करीब 12 साल पुराने इस हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। फैसला सुनाए जाने के बाद मामले की चर्चा इलाके में भी रही।













