
- जनगणना-2027 में ओबीसी कॉलम और अत्याचार निवारण एक्ट की मांग, 5 अक्टूबर को प्रदर्शन
- आरएसएस और बीजेपी अपनी वैचारिक सोच से ही ओबीसी विरोधी : मनोज यादव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी जनगणना और ओबीसी वर्ग के अधिकारों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। पिछड़ा वर्ग विभाग, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 5 अक्टूबर 2026 सोमवार को लखनऊ में राजभवन घेराव का बड़ा ऐलान किया है। कांग्रेस ने मांग की है कि जनगणना-2027 में ओबीसी का स्पष्ट कॉलम जोड़ा जाए और प्रगणकों को जातियों की ड्रॉप-डाउन सूची उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही, दलितों की तर्ज पर ओबीसी वर्ग के लिए भी ‘ओबीसी अत्याचार निवारण एक्ट’ लागू करने की पुरजोर मांग उठाई गई है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के ओबीसी प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि पार्टी लगातार बिहार और तेलंगाना के तर्ज पर देश भर में वैज्ञानिक जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के बावजूद सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
मनोज यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरएसएस और बीजेपी अपनी वैचारिक सोच से ही ओबीसी विरोधी हैं। लोकसभा चुनाव में हार के डर से जातिगत गिनती का वादा करने वाली बीजेपी अब मुकर गई है। उत्तर प्रदेश में सामंती सोच के लोगों द्वारा लगातार ओबीसी वर्ग के लोगों की हत्याएं हो रही हैं, जो बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चुनाव के समय खुद को ओबीसी बताकर वोट तो ले लेते हैं, लेकिन जब ओबीसी को उनका वास्तविक हक और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने की बात आती है, तो वे पीछे हट जाते हैं। ओबीसी समाज का शोषण और हकमारी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी के मद्देनजर ओबीसी कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को 04 अक्टूबर, 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस समयावधि तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 05 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश का ओबीसी समाज सड़कों पर उतरकर राजभवन का घेराव करेगा।











