कानपुर किडनी कांड में बड़ा खुलासा: 8 गिरफ्तार, रडार पर आधा दर्जन अस्पताल; डॉक्टर रोहित और अली की तलाश में जुटी पुलिस

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के रावतपुर थाना क्षेत्र से शुरू हुआ अवैध किडनी खरीद-फरोख्त का काला कारोबार अब दिल्ली-एनसीआर तक फैल गया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 आरोपितों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि जांच की तपिश अब 7 से 8 बड़े अस्पतालों तक पहुंच गई है। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) एसएम कासिम आबिदी ने शुक्रवार को बताया कि इस गिरोह के तार बेहद गहरे हैं और जल्द ही कुछ बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

गाजियाबाद का डॉक्टर रोहित और ‘संदिग्ध’ डॉक्टर अली रडार पर

किडनी ट्रांसप्लांट के इस अवैध खेल में गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी डॉक्टर रोहित का नाम प्रमुखता से उभरा है। पुलिस की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली-एनसीआर में लगातार दबिश दे रही हैं। वहीं, एक अन्य संदिग्ध डॉक्टर अली की भूमिका को लेकर भी सस्पेंस गहरा गया है। जब पुलिस अली के घर पहुंची, तो परिजनों ने उसे डॉक्टर मानने से इनकार करते हुए ‘टेक्नीशियन’ बताया। हालांकि, ऑपरेशन थिएटर (OT) के अन्य कर्मचारियों ने पूछताछ में दावा किया है कि अली ही अवैध सर्जरी को अंजाम देता था। पुलिस अब इन विरोधाभासी बयानों की कड़ियां जोड़ रही है।

अस्पतालों में चल रहा था मौत का सौदा

जांच के दौरान कानपुर और आसपास के इलाकों के लगभग आधा दर्जन नामी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन अस्पतालों की मिलीभगत से ही अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे। पुलिस इन संस्थानों के रिकॉर्ड खंगाल रही है और वहां के मैनेजमेंट से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। ओटी टेक्नीशियनों से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अब तक कितने लोगों की किडनी निकाली जा चुकी है और इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है।

गरीबों को निशाना बना रहा था गिरोह

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनकी किडनी निकाल लेता था और फिर उसे ऊंचे दामों पर रसूखदार मरीजों को बेच दिया जाता था। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, पिछले दो दिनों से पुलिस लगातार साक्ष्य संकलन (Evidence Collection) में जुटी है। बरामद किए गए दस्तावेजों और मोबाइल कॉल डिटेल्स से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो इस रैकेट की जड़ों तक पहुंचने में मदद करेंगे।

पुलिस की सख्त कार्रवाई और भविष्य की रणनीति

कानपुर पुलिस इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पुलिस उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों के आधार पर जो भी अस्पताल या डॉक्टर दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फरार संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है और निजी अस्पतालों के ट्रांसप्लांट लाइसेंस की समीक्षा की जा रही है।

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