नोएडा हिंसा: मजदूरों को उकसाने के लिए QR कोड और व्हाट्सएप का जाल….पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे ‘X’ अकाउंट !

नोएडा। औद्योगिक नगरी नोएडा में पिछले दिनों हुए श्रमिकों के हिंसक विरोध प्रदर्शन को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। नोएडा पुलिस के मुताबिक, यह महज मजदूरों का गुस्सा नहीं बल्कि ‘मेलाफाइड इंटरनेशनल ऑर्गनाइज्ड एक्टिविटी’ यानी दुर्भावनापूर्ण इरादों से रची गई एक अंतरराष्ट्रीय साजिश थी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि इस हिंसा के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं।

पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे सोशल मीडिया हैंडल

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने पीसी (PC) में चौंकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि जब 13 अप्रैल को प्रदर्शन शांत हो रहा था, तभी दो ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल्स से पुलिस फायरिंग में मजदूरों की मौत की झूठी खबरें फैलाई गईं। जब पुलिस ने इन हैंडल्स की जांच की और डेटा खंगाला, तो पता चला कि ये दोनों हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे। पिछले तीन महीनों से ये हैंडल VPN का इस्तेमाल कर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे।

मजदूरों को उकसाने के लिए QR कोड और व्हाट्सएप का जाल

नोएडा पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि हिंसा को अंजाम देने के लिए बहुत ही सुनियोजित तरीका अपनाया गया था। 9 और 10 अप्रैल को शहर में QR कोड बांटकर मजदूरों को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। इन ग्रुप्स के जरिए ही भड़काऊ संदेश भेजे गए। 11 अप्रैल को जब पुलिस और मजदूरों के बीच शांतिपूर्ण समझौता हो गया था, तब कुछ बाहरी तत्वों ने भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उकसाया और सड़कें जाम करवा दीं। आरोपियों ने ही 13 अप्रैल को मदरसन फैसिलिटी के बाहर भारी भीड़ जुटाई थी।

‘ऑटो चालक’ और ‘बेरोजगार’ के नाम पर घूम रहे थे साजिशकर्ता

इस पूरी साजिश में मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद मुख्य आरोपी बनकर उभरे हैं। पुलिस के अनुसार, रूपेश राय 2018 से और आदित्य आनंद 2020 से देश के विभिन्न अशांत इलाकों में सक्रिय रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि रूपेश खुद को एक साधारण ऑटो-रिक्शा चालक बताता है, जबकि आदित्य खुद को बेरोजगार। पुलिस का दावा है कि ये लोग स्थानीय मजदूर नहीं बल्कि ‘प्रोफेशनल आंदोलनकारी’ हैं जिनका मकसद औद्योगिक शांति भंग करना है।

अब तक 62 गिरफ्तार, दोषियों पर लगेगा NSA

नोएडा पुलिस इस मामले में बेहद सख्त रुख अपना रही है। कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस पर हमला करने वाली भीड़ में स्थानीय मजदूरों से ज्यादा बाहरी तत्व शामिल थे। अब तक इस मामले में 13 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फरार आरोपी आदित्य आनंद की तलाश में छापेमारी जारी है। पुलिस प्रशासन ने घोषणा की है कि इस अंतरराष्ट्रीय साजिश में शामिल मुख्य आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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