नोएडा/गौतमबुद्धनगर। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुए श्रमिकों के आंदोलन के बाद अब प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में है। श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और औद्योगिक इकाइयों में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए श्रम विभाग ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। विभाग ने श्रम कानूनों की अनदेखी करने वाले 43 संविदाकारों (ठेकेदारों) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं, गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर 10 ठेकेदारों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
लापरवाह ठेकेदारों पर गिरी गाज, ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि पिछले दिनों विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के दौरान श्रम कानूनों के उल्लंघन के कई मामले प्रकाश में आए थे। पूर्व में नोटिस दिए जाने के बावजूद जिन ठेकेदारों ने कार्यशैली में सुधार नहीं किया, उनके खिलाफ यह सख्त कदम उठाया गया है। लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही विभाग ने इन 10 संविदाकारों को भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति करते हुए श्रमायुक्त उत्तर प्रदेश को पत्र भेजा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि श्रमिकों के हक में कोताही बरतने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इंडस्ट्रियल एरिया और लेबर कॉलोनियों में स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक
एक तरफ जहां श्रम विभाग नियमों का डंडा चला रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन श्रमिकों के कल्याण के लिए स्वास्थ्य योजनाओं का खाका तैयार कर चुका है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के साथ बैठक कर श्रमिकों के लिए व्यापक चिकित्सा योजना बनाई है। अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और लेबर कॉलोनियों में नियमित मेडिकल कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों के माध्यम से श्रमिकों और उनके परिजनों को मुफ्त जांच, दवाइयां और प्राथमिक उपचार की सुविधा मिलेगी।
मोबाइल ओपीडी और महिला स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार, दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए ‘मोबाइल मेडिकल वैन’ और ‘मिनी ओपीडी’ की व्यवस्था की जा रही है। विशेष रूप से महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कैंपों में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके अलावा, नेत्र जांच शिविरों के माध्यम से मोतियाबिंद का इलाज और मुफ्त चश्मा वितरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। निजी अस्पतालों को सीएसआर (CSR) फंड के तहत इस माइक्रो प्लान में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयुष्मान भारत से जुड़ेंगे और अधिक अस्पताल
प्रशासन का लक्ष्य श्रमिकों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देना है। इसके लिए जिला अस्पताल, सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) में संसाधनों को दुरुस्त किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने आयुष्मान भारत योजना के तहत अधिक से अधिक निजी अस्पतालों को जोड़ने की रणनीति बनाई है, ताकि गंभीर बीमारियों की स्थिति में श्रमिकों को मुफ्त इलाज मिल सके। प्रशासन की इस पहल से जिले के लाखों श्रमिकों और उनके परिवारों को सीधा लाभ पहुंचने की उम्मीद है।














