नई दिल्ली। देश की राजनीति में आधी आबादी के हक को लेकर छिड़ी जंग ने अब एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर हुए मतदान ने विपक्षी खेमे की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदन में मौजूद 230 विपक्षी सांसदों द्वारा बिल के खिलाफ वोट किए जाने के कारण यह ऐतिहासिक विधेयक गिर गया है। सदन में बिल का गिरना न केवल महिलाओं के राजनीतिक भविष्य के लिए एक झटका है, बल्कि इसने आगामी चुनावों के लिए एक नई सियासी बिसात भी बिछा दी है। भाजपा ने अब इस हार को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक जीत में बदलने की तैयारी कर ली है।
पीएम मोदी की भावुक अपील भी रही बेअसर, अब भाजपा होगी हमलावर
सदन की कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से बेहद भावुक और स्पष्ट अपील की थी। उन्होंने कहा था कि श्रेय की राजनीति को किनारे रखकर विपक्ष चाहे तो सारा क्रेडिट खुद ले ले, लेकिन महिलाओं के संवैधानिक हक के लिए इस बिल को पारित होने दें। हालांकि, विपक्ष ने तकनीकी खामियों और अन्य तर्कों का हवाला देते हुए इसके खिलाफ मतदान किया। अब भाजपा इसे सार्वजनिक मंचों पर एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने जा रही है। पार्टी का सीधा नैरेटिव है कि उन्होंने ईमानदारी से प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने महिलाओं के सशक्तिकरण में अड़ंगा लगा दिया।
चुनावी गणित: 1.5 करोड़ का अंतर और 20 करोड़ महिलाओं का ‘पावर’
अगर हम आंकड़ों की गहराई में जाएं, तो विपक्ष के लिए यह फैसला भारी पड़ता दिख रहा है। देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र की कामकाजी महिलाओं की संख्या लगभग 20 करोड़ है, जो कुल महिला आबादी का 50 प्रतिशत से अधिक है। 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच हार-जीत का कुल अंतर महज 1.5 करोड़ वोटों का था। ऐसे में जानकारों का मानना है कि यदि इन 20 करोड़ जागरूक महिलाओं में से मात्र 10 प्रतिशत भी विपक्ष के इस कदम से नाराज होती हैं, तो विपक्षी दलों का सत्ता का सपना चकनाचूर हो सकता है।
तकनीकी दांव-पेंच बनाम महिलाओं की हिस्सेदारी
सियासी विशेषज्ञों का कहना है कि आम महिला मतदाता परिसीमन या जनगणना जैसे जटिल तकनीकी दांव-पेंचों को भले न समझे, लेकिन वह यह बखूबी जानती है कि इस बिल के पास होने से लोकसभा में उनकी भागीदारी 74 से बढ़कर दोगुनी से ज्यादा हो जाती। बिहार में नीतीश कुमार की सफलता और मध्य प्रदेश, बंगाल व महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं के नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि ‘साइलेंट वोटर’ के रूप में महिला शक्ति किसी भी दल का तख्तापलट करने में सक्षम है। भाजपा अब इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाने की योजना बना चुकी है, जिससे विपक्ष फिलहाल रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रहा है।















