गर्मियों में ‘बम’ न बन जाए आपका AC: एयर कंडीशनर ब्लास्ट के ये हैं 5 बड़े कारण और बचाव के अचूक उपाय

नई दिल्ली: उत्तर भारत में पारा 44 डिग्री के पार जा चुका है और इस भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर (AC) ही एकमात्र सहारा बचा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सुखद नींद का साथी AC लापरवाही बरतने पर एक ‘खतरनाक बम’ में तब्दील हो सकता है? पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से AC ब्लास्ट और आगजनी की कई खबरें सामने आई हैं। अक्सर लोग इसे महज एक हादसा मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे तकनीकी चूक और मेंटेनेंस की कमी जिम्मेदार होती है।

AC ब्लास्ट होने की 5 सबसे बड़ी वजहें

1. कंप्रेसर की ओवरहीटिंग

गर्मी में जब बाहरी तापमान बहुत अधिक होता है, तो कमरे को ठंडा करने के लिए AC के कंप्रेसर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। अगर AC को बिना ब्रेक दिए 24-24 घंटे चलाया जाए, तो मशीन ओवरहीट हो जाती है। कूलिंग सिस्टम में खराबी होने पर यह गर्मी विस्फोट का रूप ले सकती है।

2. खराब वायरिंग और शॉर्ट सर्किट

अक्सर लोग पुराने घरों में लगे पुराने तारों पर ही नया हाई-टन AC लगवा लेते हैं। खराब क्वालिटी या पुरानी वायरिंग ज्यादा बिजली का लोड नहीं झेल पाती, जिससे तारों के पिघलने और स्पार्किंग होने का खतरा रहता है। यही शॉर्ट सर्किट आगे चलकर बड़े हादसे का कारण बनता है।

3. गैस लीक और अनियंत्रित प्रेशर

AC के भीतर रेफ्रिजरेंट गैस का एक निश्चित प्रेशर होता है। अगर पाइपलाइन में कहीं लीकेज है या गैस का प्रेशर अचानक बढ़ जाता है, तो कंप्रेसर इसे सहन नहीं कर पाता। ज्वलनशील गैस होने के कारण लीकेज के साथ स्पार्किंग मिलते ही ब्लास्ट हो जाता है।

4. सर्विसिंग में कंजूसी

सालों तक सर्विस न कराना AC के लिए जानलेवा है। गंदे फिल्टर और कॉइल्स पर जमी धूल एयर फ्लो (हवा के बहाव) को रोक देती है। इससे मशीन को ठंडा करने के लिए इंजन को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे सिस्टम फेलियर की संभावना बढ़ जाती है।

5. लोकल स्पेयर पार्ट्स का जाल

पैसे बचाने के चक्कर में लोकल मैकेनिक से घटिया क्वालिटी के कंडेंसर या कैपेसिटर लगवाना भारी पड़ सकता है। ये पार्ट्स मानक के अनुरूप नहीं होते और हाई वोल्टेज या ज्यादा तापमान में तुरंत जवाब दे जाते हैं।

कैसे रहें सुरक्षित? अपनाएं ये सुरक्षा टिप्स

  • प्रोफेशनल सर्विसिंग: हर सीजन की शुरुआत में अधिकृत सर्विस सेंटर से ही AC की गहन जांच कराएं।

  • वायरिंग का चेकअप: सुनिश्चित करें कि आपके AC के लिए सही मोटाई और ISI मार्क वाली कॉपर वायरिंग का ही इस्तेमाल हुआ हो।

  • मशीन को दें ब्रेक: AC को लगातार 7-8 घंटे चलाने के बाद कम से कम आधे से एक घंटे का ब्रेक दें ताकि कंप्रेसर ठंडा हो सके।

  • स्टेबलाइजर का प्रयोग: बिजली के उतार-चढ़ाव (Fluctuation) से बचने के लिए अच्छी क्वालिटी का वोल्टेज स्टेबलाइजर या सर्ज प्रोटेक्टर जरूर लगाएं।

  • गैस लेवल की जांच: समय-समय पर मैकेनिक से गैस के प्रेशर और लीकेज की जांच करवाते रहें।

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