कानपुर: गुरुकुल गए मासूम की संदिग्ध मौत, आंगन का इकलौता चिराग बुझा; शरीर पर चोट के निशान देख हत्या की आशंका

सरसौल (कानपुर नगर)। एक मजदूर पिता ने अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा जोड़कर अपने इकलौते बेटे को इस उम्मीद में लखनऊ के गुरुकुल भेजा था कि वह पढ़-लिखकर बुढ़ापे की लाठी बनेगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज 10 दिन पहले घर से हंसी-खुशी विदा हुआ 11 वर्षीय दिवांश बुधवार को कफन में लिपटा लौटा। मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि पूरे महाराजपुर क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।

सपनों का कत्ल: बेहतर शिक्षा के लिए भेजा था लखनऊ

महाराजपुर के गोरिया गांव निवासी नरेंद्र कुमार द्विवेदी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके परिवार में पत्नी नीरज देवी, एक बेटी और इकलौता बेटा दिव्यांश (11) था। नरेंद्र ने बताया कि अपने साले जितेंद्र प्रसाद तिवारी की सलाह पर उन्होंने बीते 15 अप्रैल को दिव्यांश का दाखिला लखनऊ के आलम नगर स्थित ‘रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल’ में कराया था। उन्हें उम्मीद थी कि वेद और संस्कार की शिक्षा पाकर उनका बेटा उनका नाम रोशन करेगा, लेकिन प्रवेश के महज 10 दिन बाद ही खुशियां मातम में बदल गईं।

सीढ़ियों से गिरने की सूचना और घर के सामने मिला लहूलुहान बेटा

घटनाक्रम बेहद उलझा हुआ और संदिग्ध है। बुधवार को नरेंद्र को सूचना मिली कि दिवांश लखनऊ में सीढ़ियों से गिर गया है और उसे चोट आई है। पिता अभी लखनऊ जाने की तैयारी ही कर रहे थे कि उन्हें जानकारी मिली कि दिवांश उनके गांव वाले घर के सामने ही मरणासन्न हालत में पड़ा है। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर सरसौल के अस्पताल पहुंचे, जहाँ से उसे हैलट अस्पताल रेफर कर दिया गया। आर्थिक तंगी के बावजूद पिता उसे निजी अस्पताल भी ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। अंततः हैलट अस्पताल के डॉक्टरों ने दिवांश को मृत घोषित कर दिया।

शरीर पर चोट के निशान, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

दिव्यांश का शव जब गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया। मासूम के शरीर पर मौजूद चोट के निशान चीख-चीखकर किसी अनहोनी की गवाही दे रहे थे। परिजनों का आरोप है कि बच्चे के साथ मारपीट की गई है और यह सामान्य हादसा नहीं बल्कि हत्या है। मां नीरज देवी बेटे के शव को देख बार-बार बेहोश हो रही हैं, वहीं पिता बदहवास हालत में पुलिस से सिर्फ एक ही गुहार लगा रहे हैं— “साहब, मेरे बेटे के कातिलों को सजा दो।”

पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी, दर्ज हुई एफआईआर

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस उपायुक्त (पूर्वी), सहायक पुलिस आयुक्त (चकेरी) और महाराजपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। घटना को संदिग्ध मानते हुए फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि पिता की तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि लखनऊ में पढ़ने वाला बच्चा संदिग्ध हालत में कानपुर में अपने घर के बाहर कैसे पहुंचा और उसकी मौत की असल वजह क्या है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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