पाकिस्तान का तेल संकट: डगमगाती अर्थव्यवस्था और महंगे ईंधन की दोहरी मार, जानें सरकार के ‘संकटमोचन’ प्लान

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों ने देश के खजाने पर भारी बोझ डाल दिया है, जिससे सरकार की रातों की नींद उड़ गई है। विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और बढ़ता व्यापार घाटा पाकिस्तान के लिए ‘कोढ़ में खाज’ जैसा साबित हो रहा है। आलम यह है कि अप्रैल में व्यापार घाटा बढ़कर 4.07 अरब डॉलर के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस ऊर्जा संकट से निपटने के लिए शहबाज शरीफ सरकार अब कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है।

ईंधन बचत और आयात नियंत्रण की सख्त नीति

सरकार ने सबसे पहले अपने घर से सुधार की शुरुआत की है। बढ़ते तेल बिल को कम करने के लिए सरकारी विभागों में ईंधन और बिजली की खपत पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। गैर-जरूरी आधिकारिक यात्राओं पर रोक लगा दी गई है और ऊर्जा बचत अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर तेज किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि किसी भी तरह से आयातित तेल की मांग को कम किया जाए ताकि डॉलर की बचत हो सके। इसके अलावा, गैर-जरूरी सामानों के आयात पर भी सख्ती बरती जा रही है।

खाड़ी देशों से ‘उधार’ तेल की उम्मीद

पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। ऐसे में वह अपने पुराने सहयोगियों—सऊदी अरब, कतर और यूएई की ओर देख रहा है। सरकार इन खाड़ी देशों के साथ ऐसे समझौतों की कोशिश कर रही है जिसमें उसे ‘डेफर्ड पेमेंट’ (आसान किस्तों या लंबी अवधि में भुगतान) की सुविधा मिल सके। अगर ये देश उधार पर तेल और गैस देने को राजी हो जाते हैं, तो पाकिस्तान के गिरते विदेशी मुद्रा भंडार को फौरी तौर पर ऑक्सीजन मिल सकती है।

अक्षय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन पर जोर

लंबे समय के समाधान के तौर पर पाकिस्तान अब सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रहा है। सरकार का मानना है कि अगर बिजली उत्पादन में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ती है, तो तेल-गैस का आयात कम करना संभव होगा। साथ ही, पुराने गैस ब्लॉकों में उत्पादन बढ़ाने और नए क्षेत्रों की खोज पर भी काम शुरू किया गया है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके परिणाम आने में काफी समय लगेगा।

IMF की कड़ी शर्तें और जनता पर बोझ

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भी लगातार बातचीत कर रही है। हालांकि, IMF से मिलने वाला राहत पैकेज मुफ्त नहीं आता। इसके बदले पाकिस्तान को भारी सब्सिडी कटौती और बिजली-पेट्रोल की कीमतों में भारी इजाफे जैसे कड़े फैसले लेने होंगे। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, जो पहले से ही बेकाबू महंगाई की मार झेल रही है।

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