NEET-UG 2026 पेपर लीक: नासिक प्रिंटिंग प्रेस से लेकर टेलीग्राम के ‘प्राइवेट माफिया’ तक, ऐसे रची गई देश के सबसे बड़े पेपर लीक की साजिश

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, तकनीक और साजिश का एक ऐसा खतरनाक जाल सामने आ रहा है जिसने देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस बार इस घोटाले का मुख्य केंद्र महाराष्ट्र का नासिक बनकर उभरा है, जहां से लीक हुआ पेपर देश के आधा दर्जन से अधिक राज्यों में बिजली की गति से फैलाया गया।

साजिश का ‘नासिक मॉडल’: हाई-टेक और बेहद शातिर

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कोई साधारण पेपर चोरी नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझने ‘डिजिटल स्ट्राइक’ थी। नासिक में इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कुछ चौंकाने वाले तरीके अपनाए गए:

  • 30 मिनट की ‘सुरक्षित’ सेंधमारी: एक निजी कूरियर सर्विस के कर्मचारी की मिलीभगत से प्रश्नपत्रों के सुरक्षित ट्रंक को करीब 30 मिनट के लिए खोला गया।

  • HD स्कैनर का उपयोग: पेपर की फोटो खींचने के बजाय हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर का इस्तेमाल किया गया ताकि टेलीग्राम पर चलने वाले ‘प्राइवेट माफिया’ जैसे समूहों को बिल्कुल स्पष्ट (HD) इमेज मिल सके।

  • शैडो सर्वर और आईटी स्टार्टअप का इस्तेमाल: डेटा को ट्रैक होने से बचाने के लिए नासिक के बाहरी इलाके में एक ‘शैडो सर्वर’ बनाया गया। मास्टरमाइंड ने एक छोटे आईटी स्टार्टअप की लीज्ड लाइन का उपयोग किया ताकि इंटरनेट ट्रैफिक को सामान्य दिखाया जा सके और NTA की AI मॉनिटरिंग को चकमा दिया जा सके।

मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी: जयपुर से जुड़े तार

राजस्थान पुलिस की SOG (Special Operations Group) ने इस मामले में दो बड़ी मछलियों को दबोचा है:

  1. मनीष यादव: इसे पेपर लीक का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसे जयपुर से हिरासत में लिया गया है।

  2. राकेश मंडावरिया: इस पर लीक हुए पेपर को विभिन्न राज्यों के सॉल्वर गैंग्स तक वितरित करने का आरोप है।

पेपर का सफर: नासिक से हरियाणा और फिर देशभर में

जांच के अनुसार, नासिक में पेपर की डिजिटल कॉपी तैयार होने के 42 घंटे पहले ही केमिस्ट्री के 120 प्रश्नों का पूरा सेट तैयार कर लिया गया था।

  • सबसे पहले कहां पहुंचा? नासिक के बाद पेपर की पहली खेप सबसे पहले हरियाणा पहुंची।

  • प्रभावित राज्य: इसके बाद यह जाल राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड तक फैल गया।

ब्लाइंड लिंक और लॉजिस्टिकल सेंधमारी

अब जांच एजेंसियां ‘ब्लाइंड लिंक’ (वह गुप्त संपर्क जिसके बारे में कोई सुराग न हो) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यह खुलासा हुआ है कि नासिक के एक कोचिंग संस्थान के संचालक और राजस्थान के मास्टरमाइंड के बीच गहरा संबंध था। इन दोनों ने मिलकर परीक्षा की लॉजिस्टिकल सुरक्षा (यानी पेपर के आने-जाने के रास्ते) को पूरी तरह से भेद दिया।

22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में

NEET-UG जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में शामिल होने वाले 22 लाख छात्रों के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं है। एक तरफ जहां छात्र दिन-रात मेहनत कर मेडिकल सीटों के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे संगठित गिरोह चंद घंटों में उनकी मेहनत पर पानी फेर देते हैं।

अभिभावकों और छात्र संगठनों की मांग है कि इस ‘शिक्षा माफिया’ के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और पूरी प्रक्रिया को फिर से पारदर्शी बनाया जाए।

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