NEET Paper Leak: पुणे से ब्यूटी पार्लर संचालिका मनीषा गिरफ्तार, मास्टरमाइंड धनंजय लोखंडे से जुड़े तार, CBI की बड़ी कार्रवाई

पुणे/नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) और पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी मिली है। संयुक्त छापेमारी में पुणे के सुखसागर नगर इलाके से मनीषा वाघमारे नामक महिला को हिरासत में लिया गया है। इस घोटाले में यह किसी महिला की पहली गिरफ्तारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मनीषा इस पूरे ‘एजुकेशन अंडरवर्ल्ड’ की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो मुख्य आरोपियों और छात्रों के बीच मध्यस्थ (Broker) की भूमिका निभा रही थी।

कौन है मनीषा वाघमारे और क्या है उसका रोल?

मनीषा वाघमारे पुणे में एक ब्यूटी पार्लर चलाती हैं और उनके पति पेशे से डेंटिस्ट हैं। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, मनीषा इस घोटाले के कथित मास्टरमाइंड धनंजय लोखंडे के सीधे संपर्क में थीं। आरोप है कि मनीषा का काम उन रसूखदार और जरूरतमंद छात्रों व अभिभावकों की तलाश करना था, जो पेपर खरीदने के लिए मोटी रकम देने को तैयार थे। पुलिस ने मनीषा के पास से मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किया है, जिसमें कई संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड्स और चैट्स मिलने की उम्मीद है।

मास्टरमाइंड धनंजय लोखंडे का नासिक कनेक्शन

इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा धनंजय लोखंडे खुद एक डॉक्टर (BAMS) है और पुणे के वाघोली इलाके में रहता था। धनंजय का नाम तब सामने आया जब सीबीआई ने नासिक से गिरफ्तार आरोपी डॉ. शुभम खैरनार से कड़ी पूछताछ की। जांच में पता चला है कि शुभम खैरनार को नीट पेपर की ‘गोपनीय पीडीएफ’ (PDF) धनंजय लोखंडे ने ही उपलब्ध कराई थी। धनंजय मेडिकल प्रैक्टिस की आड़ में एडमिशन कंसल्टेंसी चलाता था, जिसकी आड़ में वह पेपर लीक का काला कारोबार कर रहा था।

42 घंटे पहले लीक हुआ पेपर और डिजिटल ट्रेल

सीबीआई को शक है कि यह रैकेट केवल पुणे या नासिक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार देश के कई अन्य राज्यों से जुड़े हैं। मनीषा और धनंजय जैसे लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले ही पेपर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे थे। जांच एजेंसियां अब उन बैंक ट्रांजैक्शन्स को खंगाल रही हैं, जिनके जरिए मनीषा और उसके साथियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

CBI की रडार पर कई और संदिग्ध

मनीषा की गिरफ्तारी के बाद अब पुणे और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में भी छापेमारी तेज कर दी गई है। सीबीआई को संदेह है कि इस रैकेट में कई अन्य सफेदपोश लोग, कोचिंग संस्थान और एडमिशन कंसल्टेंट्स शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं, जो इस ‘एजुकेशन अंडरवर्ल्ड’ के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर सकती हैं।

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