भुवनेश्वर/नई दिल्ली। ओडिशा से कुछ समय पहले सामने आई एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसने बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता और अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी थीं. एक बेबस आदिवासी व्यक्ति को अपनी मृत बहन के सेविंग्स अकाउंट में जमा गाढ़ी कमाई को निकालने के लिए, सबूत के तौर पर उसका ‘कंकाल’ लेकर बैंक शाखा की चौखट पर पहुंचना पड़ा था. इस शर्मनाक और अमानवीय घटना पर अब केंद्र सरकार ने बेहद कड़ा और कड़ा रुख अख्तियार किया है. मामले की गंभीरता और देश भर में हुए आक्रोश को देखते हुए संबंधित बैंक के ब्रांच मैनेजर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने देशभर के सभी ग्रामीण बैंकों के लिए कड़े नियम और एडवाइजरी जारी कर दी है.
यह पूरी प्रशासनिक कार्रवाई केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे गए एक पत्र के बाद सार्वजनिक हुई है. आपको बता दें कि नवीन पटनायक ने बीती 2 मई को केंद्रीय मंत्री को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने बैंक में प्रक्रियात्मक देरी और कड़े नियमों की आड़ में एक गरीब आदिवासी परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया था.
खाते में नॉमिनी न होने के चलते फंसा था गरीब का पैसा
नवीन पटनायक के पत्र का सिलसिलेवार जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि शिकायत मिलते ही ओडिशा ग्रामीण बैंक (OGB) के माध्यम से इस पूरे संवेदनशील मामले की गहनता से जांच कराई गई. बैंक द्वारा सौंपी गई आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मृत महिला खाताधारक ‘कालरा मुंडा’ के अकाउंट में कोई भी जीवित नॉमिनी (Nominee) दर्ज नहीं था. बैंकिंग नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में क्लेम के निपटारे के लिए डेथ सर्टिफिकेट या कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) के प्रामाणिक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता है, जिसे लेकर बैंक अड़ा हुआ था.
केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि बाद में जब यह मामला मीडिया में आया, तो स्थानीय प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जरूरी कानूनी दस्तावेज आनन-फानन में तैयार कराए गए. इसके बाद मृतका के खाते में जमा ₹19,402 की कुल क्लेम राशि उसके भाई जीतू मुंडा और दो अन्य वैध कानूनी उत्तराधिकारियों को सौंप दी गई.
मल्लिपोसी ब्रांच के मैनेजर पर गिरी गाज, किए गए सस्पेंड
केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा कि फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है. यह सच है कि बैंकिंग कामकाज में तय प्रक्रियाओं और नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इन प्रक्रियाओं को पूरी संवेदनशीलता, सहानुभूति और प्रभावी मानवीय दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए, खासकर ग्रामीण और सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में जहां साक्षरता दर कम है.
इस घोर लापरवाही और मानवीय संवेदनहीनता के लिए सबसे पहले एक्शन लेते हुए ओडिशा ग्रामीण बैंक (OGB) ने घटना वाली मल्लिपोसी ब्रांच के मैनेजर को सस्पेंड कर दिया. इसके अलावा, बैंक बोर्ड की मंजूरी के बाद ओजीबी ने अपने सभी फील्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, ताकि भविष्य में ग्राहकों को पारदर्शी, त्वरित और सम्मानजनक सेवाएं मिल सकें.
देश के सभी 28 ग्रामीण बैंकों (RRB) के लिए सख्त एडवाइजरी लागू
ओडिशा की इस झकझोर देने वाली घटना का सीधा असर अब देश के बैंकिंग रिफॉर्म्स पर भी देखने को मिल रहा है. देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) में आम नागरिकों को केंद्र में रखकर बैंकिंग सेवाएं बेहतर करने और ऐसी अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति को हमेशा के लिए रोकने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने एक बहुत बड़ा नीतिगत कदम उठाया है.
विभाग ने देश के सभी 28 RRB के शीर्ष प्रबंधन को एक सख्त एडवाइजरी जारी कर निर्देश दिया है कि वे ग्रामीण, आदिवासी और समाज के अन्य कमजोर व पिछड़े वर्गों के ग्राहकों के साथ डील करते समय अत्यधिक संवेदनशीलता बरतें. बैंकों को आदेश दिया गया है कि वे ग्राहकों के प्रति जवाबदेह, संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और पारदर्शी सेवा प्रणाली सुनिश्चित करें ताकि किसी भी गरीब को नियमों के जाल में फंसकर इस तरह प्रताड़ित न होना पड़े.














