लखीसराय। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET UG 2026) की पुनर्परीक्षा के दौरान बिहार के लखीसराय जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है. यहां परीक्षा माफियाओं ने सेंधमारी का ऐसा ताना-बाना बुना, जिसने जिला प्रशासन से लेकर जांच एजेंसियों तक के होश उड़ा दिए हैं. पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त छापेमारी में अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से फर्जी अभ्यर्थियों (स्कॉलर्स), उनके मददगारों और सबसे हैरान करने वाली बात- बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करने वाले कर्मियों सहित कुल 30 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती तफ्तीश से साफ हो गया है कि यह कोई छिटपुट नकल का मामला नहीं, बल्कि एक बेहद संगठित और हाईटेक परीक्षा माफिया नेटवर्क का हिस्सा है.
4 परीक्षा केंद्रों पर एक साथ रेड, हिल गया पूरा प्रशासनिक अमला
दरअसल, 21 जून को लखीसराय जिले के 4 निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर नीट पुनर्परीक्षा (NEET Re-Exam 2026) का आयोजन किया गया था. परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद खुफिया इनपुट मिला कि मूल और वास्तविक परीक्षार्थियों की जगह भारी रकम लेकर ‘डमी या स्कॉलर कैंडिडेट्स’ को परीक्षा हॉल में बैठाया गया है. खबर मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया. अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के नेतृत्व में एक विशेष जॉइंट टीम का गठन किया गया. इस टीम ने केआरके कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर सहित विभिन्न केंद्रों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिससे परीक्षा केंद्रों पर हड़कंप मच गया.
AIIMS, BHU और UCMS दिल्ली के MBBS-न Nursing छात्र बने ‘मुन्नाभाई’
इस पूरे रैकेट की जो सबसे भयावह तस्वीर सामने आई है, वह शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली है. पुलिस की पूछताछ और डॉक्युमेंट्स की स्क्रूटनी में पता चला कि दूसरों के नाम पर परीक्षा देने पहुंचे ये स्कॉलर्स कोई साधारण छात्र नहीं, बल्कि देश के टॉप-नॉच मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे भविष्य के डॉक्टर हैं. जांच एजेंसियां भी इस बात से सन्न हैं कि देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा पा रहे ये होनहार छात्र महज पैसों के लालच में इस दलदल में कैसे कूद गए.
पकड़े गए स्कॉलर्स में न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज, एएनएमसीएच (ANMCH) गया, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना, एम्स (AIIMS) रायबरेली, बीएचयू (BHU) नर्सिंग, यूसीएमएस (UCMS) दिल्ली, एनएमसीएच (NMCH) पटना और गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज ओडिशा जैसे नामी संस्थानों के एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्र शामिल हैं. पुलिस को अंदेशा है कि इन मेडिकल छात्रों को मोटी रकम का एडवांस देकर हायर किया गया था.
बायोमेट्रिक ऑपरेटरों से साठगांठ, फर्जी आइडेंटिटी कार्ड का इस्तेमाल
पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि इस महाफर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए असली अभ्यर्थियों की शक्ल से मिलते-जुलते चेहरे वाले स्कॉलर्स को चुना गया. इसके बाद उनके फर्जी पहचान पत्र और कूट रचित दस्तावेज (Forged Documents) तैयार किए गए. माफिया ने सिर्फ कागजी हेरफेर ही नहीं की, बल्कि डिजिटल सुरक्षा को भेदने के लिए परीक्षा केंद्र के भीतर मौजूद बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) करने वाले कर्मियों को भी मोटी रिश्वत देकर अपने साथ मिला लिया था. यही वजह है कि बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान मिसमैच होने के बावजूद इन फर्जी डॉक्टरों को आसानी से एंट्री मिल गई.


गिरफ्तार आरोपियों की पूरी लिस्ट: स्कॉलर्स से लेकर बायोमेट्रिक स्टाफ तक नपे
पुलिस ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की हैं, जिनकी सूची इस प्रकार है:
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फर्जी अभ्यर्थी (स्कॉलर्स): मंतोष कुमार (न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज), विवेक कुमार (एएनएमसीएच गया), हिमांशु कुमार (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना), सौरभ जीझा (AIIMS रायबरेली), पूनम कुमारी (BHU नर्सिंग), अमन अग्रवाल (यूसीएमएस दिल्ली), रौशन कुमार (एनएमसीएच पटना), चंचल कुमारी (गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा) और जितेंद्र कुमार.
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मूल अभ्यर्थी और मददगार: संजीत कुमार (मूल अभ्यर्थी) और उसके दो मुख्य सहयोगी अर्पित सिंह व रंजीत कुमार.
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बायोमेट्रिक स्टाफ और सुपरवाइजर: मिलीभगत के आरोप में बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुंद कुमार, उदय कुमार, अखिलेश कुमार, मयंक कश्यप, विशाल कुमार, राकेश कुमार, अंकित कुमार (अन्य), मोहित कुमार, सुदर्शन कुमार, अमलेश कुमार, अदिति कुमारी, घनश्याम कुमार, शंकर कुमार वर्मा, आर्यन कुमार और चंदन कुमार को दबोचा गया है.
जिलाधिकारी का सख्त अल्टीमेटम: ‘कोई कितना भी रसूखदार हो, बख्शा नहीं जाएगा’
लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर संगठित फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत मिले हैं. उन्होंने साफ किया कि परीक्षा की सुचिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं हो सकता. पकड़े गए लोगों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, जिससे इस सिंडिकेट के सरगनाओं के बारे में कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इस रैकेट के पीछे चाहे कितनी भी प्रभावशाली या रसूखदार राजनीतिक-प्रशासनिक ताकत हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. नीट जैसी परीक्षा में इस तरह का फर्जीवाड़ा उन लाखों ईमानदार बच्चों के भविष्य पर लात मारने जैसा है, जो दिन-रात एक कर डॉक्टर बनने की तैयारी करते हैं.















