वास्तु शास्त्र टिप्स: घर में किस दिशा और जगह पर भूलकर भी न लगाएं पूर्वजों की तस्वीरें, वरना बढ़ सकती हैं मुश्किलें

लखनऊ। हिंदू धर्म और सनातन परंपरा में पूर्वजों (पितरों) को देवताओं के समान पूजनीय माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पूर्वजों की तस्वीरें लगाने का एक विशेष महत्व होता है, क्योंकि माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह और पारिवारिक तालमेल बना रहता है। हालांकि, वास्तु एक्सपर्ट्स यह चेतावनी भी देते हैं कि यदि इन तस्वीरों को अनजाने में गलत दिशा या गलत जगह पर रख दिया जाए, तो घर का वास्तु संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है, जिससे जीवन में कई तरह के नकारात्मक प्रभावों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं पूर्वजों की तस्वीरों से जुड़े कुछ बेहद जरूरी वास्तु नियम, जो हमें इस अनजाने दोष से बचा सकते हैं:

1. बेडरूम में लगाने से बचें, भंग हो सकती है मानसिक शांति

वास्तु विज्ञान के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीरें कभी भी बेडरूम में, विशेषकर बिस्तर के ठीक सामने या निजी स्थानों पर नहीं लगानी चाहिए। बेडरूम पूरी तरह से आराम, विश्राम और प्राइवेसी (निजता) के लिए होता है। ऐसी जगहों पर पितरों की तस्वीरें लगाने से कमरे की शांतिपूर्ण और सुकून देने वाली ऊर्जा में व्यवधान पैदा होता है, जिसके चलते वैवाहिक जीवन में तनाव और नींद न आने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

2. किचन में तस्वीरें रखना माना जाता है भारी अनादर

घर के किचन (रसोई घर) को पोषण और मां अन्नपूर्णा का पवित्र स्थान माना जाता है। यहां अग्नि, जल और भोजन का वास एक साथ होता है। वास्तु के अनुसार, किचन के भीतर पूर्वजों की तस्वीरें लगाना उनका घोर अनादर माना जाता है। ऐसा करने से घर में अन्न और धन की बरकत प्रभावित होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो सकता है।

3. उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा से हमेशा बनाएं दूरी

घर की उत्तर-पूर्व दिशा या ईशान कोण को देवताओं, पूजा-पाठ और ध्यान के लिए सबसे उत्तम और पवित्र माना गया है। वास्तु शास्त्र कहता है कि इस दिशा में कभी भी पूर्वजों की तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने से आध्यात्मिक असंतुलन पैदा होता है, क्योंकि दैवीय ऊर्जा और पितरों की ऊर्जा आपस में मिल जाती है, जिसे वास्तु में सही नहीं माना गया है।

4. घर के बीचों-बीच (ब्रह्मस्थान) में कभी न दें जगह

ब्रह्मस्थान यानी घर का बिल्कुल केंद्रीय भाग (सेंटर पॉइंट) पूरे घर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। वास्तु के नियमानुसार, ब्रह्मस्थान को हमेशा पूरी तरह से खुला, साफ-सुथरा और भारीपन से मुक्त (बिना किसी रुकावट के) रखना चाहिए। यदि इस स्थान पर पूर्वजों की तस्वीरें रखी जाती हैं, तो इससे घर में आने वाली सकारात्मक और सुखद ऊर्जा का मार्ग रुक जाता है।

5. दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा भी है पूरी तरह वर्जित

घर के दक्षिण-पूर्व कोने को ‘आग्नेय कोण’ कहा जाता है, जो अग्नि तत्व और अत्यधिक उष्मिक ऊर्जा (गर्मी) से जुड़ा होता है। पूर्वज शांत और सौम्य ऊर्जा के प्रतीक होते हैं, इसलिए इस अत्यधिक गर्म कोने में उनकी तस्वीरें लगाना सही नहीं माना जाता। यहां तस्वीरें रखने से पितरों को शांतिपूर्वक याद करने के भाव में कमी आती है और घर के सदस्यों में क्रोध बढ़ सकता है।

विशेष नोट (सही दिशा): वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीरें लगाने के लिए घर की दक्षिण दिशा (South Wall) को सबसे शुभ और उत्तम माना गया है। दक्षिण दिशा की दीवार पर तस्वीर इस तरह लगाएं कि उनका मुख उत्तर दिशा की तरफ रहे। इससे पितरों का आशीर्वाद सदैव परिवार पर बना रहता है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment