अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राम मंदिर के पवित्र चढ़ावे में सेंधमारी करने वाले गद्दारों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और ताबड़तोड़ एक्शन शुरू हो गया है। राम मंदिर ट्रस्ट की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने चोरों के खिलाफ पहली एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। मामला दर्ज होते ही यूपी पुलिस ने बिजली की तेजी से कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है। इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद से ही रामभक्तों में भारी आक्रोश है।
सीसीटीवी ने खोली पोल: कैश काउंटर पर रंगेहाथों पकड़े गए ‘आस्तीन के सांप’
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा से अर्पित किए जाने वाले गुप्त दान और चढ़ावे की रकम पर खुद वहां तैनात कुछ कर्मचारियों की नीयत खराब हो गई थी। मंदिर परिसर की सुरक्षा में लगे आधुनिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालने पर कुछ लोग सीधे तौर पर कैश रूम से नोटों की गड्डियां और चढ़ावे की राशि पार करते हुए रंगेहाथों कैद हुए थे। इसके बाद हड़कंप मच गया और आनन-फानन में इस महाघोटाले की पहली एफआईआर दर्ज कराई गई। यह कड़ा एक्शन ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
चंपत राय के ड्राइवर समेत 8 नामजद, दो आरोपी सलाखों के पीछे
यह ऐतिहासिक मुकदमा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मानित सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर दर्ज किया गया है। एफआईआर में उन 8 मुख्य लोगों को नामजद किया गया है, जिनका सीधा वास्ता कैश के रखरखाव और उसकी गिनती से था। इस लिस्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खास ड्राइवर का नाम भी शामिल है, हालांकि चंपत राय का इससे कोई सीधा लेना-देना नहीं है।
गिरफ्तार और फरार आरोपियों के नाम:
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लवकुश मिश्रा: पुलिस की गिरफ्त में।
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अनुकल्प मिश्रा: पुलिस की गिरफ्त में।
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रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: (चंपत राय का ड्राइवर) फिलहाल फरार, पुलिस टीमें पीछे लगी हैं।
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अन्य नामजद आरोपी: अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे। इन सभी की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
कड़े नए कानून की इन 6 धाराओं में फंसा पेंच, हो सकती है उम्रकैद
उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त आदेश पर अयोध्या पुलिस ने आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए नए कानून ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की बेहद कड़क और गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा कायम किया है। जानिए किन धाराओं में दर्ज हुआ है केस:
धारा 3(5) [साझा मकसद]: जब कई लोग एक ही आपराधिक इरादे से मिलकर काम करते हैं, तो हर कोई बराबर का जिम्मेदार होता है।
धारा 61 [अपराधिक साजिश]: मंदिर के खजाने को नुकसान पहुंचाने के लिए आपस में गुप्त रणनीति तैयार करना।
धारा 306 [कर्मचारी द्वारा चोरी]: किसी मालिक या ट्रस्ट के अधीन काम करने वाले नौकर या क्लर्क द्वारा चोरी करना (7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना)।
धारा 316(5) [भरोसे का कत्ल]: सौंपे गए धन या संपत्ति के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात करना (इस धारा के तहत आजीवन कारावास या 10 साल तक की जेल का प्रावधान है)।
धारा 317(4) और 317(5) [चोरी का माल छिपाना]: जानबूझकर चोरी की गई राशि का लेन-देन करना, उसे ठिकाने लगाना या छिपाने में मदद करना (3 से 10 साल तक की जेल)।
6 दिनों तक SIT ने खंगाला था कोना-कोना, 5 दर्जन से अधिक लोगों से कड़ाई से पूछताछ
राम मंदिर के चढ़ावे की रकम में भारी अनियमितता और गबन के आरोप सामने आने के बाद यूपी सरकार ने बीते 13 जून को तीन वरिष्ठ सदस्यों की एक हाई-लेवल एसआईटी (SIT) का गठन किया था। एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत की अगुवाई में टीम ने लगातार 6 दिनों तक मंदिर परिसर में ही डेरा डाले रखा। इस दौरान मंदिर प्रशासन, सुरक्षाकर्मियों और ट्रस्ट से जुड़े 5 दर्जन (60 से अधिक) से ज्यादा लोगों से आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ की गई। एसआईटी चेयरमैन ने साफ किया कि यह जांच बेहद गोपनीय है और अभी सिर्फ शुरुआती रिपोर्ट दी गई है, पूरी पड़ताल के बाद अंतिम रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी।
अभेद्य किले में तब्दील हुआ कैश काउंटिंग रूम, अब परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर
एसआईटी की इस शुरुआती हिला देने वाली रिपोर्ट के बाद राम मंदिर परिसर के भीतर दान राशि के कलेक्शन और उसकी गिनती की पूरी व्यवस्था को ही पलट कर रख दिया गया है। जिन संदिग्ध कर्मचारियों पर पहले यह जिम्मेदारी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर दूसरे दूरदराज के कामों में लगा दिया गया है। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और अचूक बनाने के लिए ये बड़े बदलाव किए गए हैं:
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बैंक के नए अफसरों की एंट्री: अब दानपात्र से पैसे निकालने और गिनने के काम में मंदिर के चुनिंदा वफादार स्टाफ के साथ-साथ सीधे बैंकों के नए और प्रोफेशनल कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
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हाईटेक सीसीटीवी और सेपरेट कंट्रोल रूम: पैसों की गिनती वाली जगह की पल-पल की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क बिछाया गया है, जिसका कंट्रोल रूम पूरी तरह अलग और सुरक्षित है।
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100% शारीरिक तलाशी अनिवार्य: काउंटिंग रूम के अंदर प्रवेश करने और वहां से बाहर निकलने वाले हर एक शख्स की शत-प्रतिशत सघन तलाशी ली जा रही है।
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ट्रिपल क्रॉस वेरिफिकेशन: अब बैंक में कैश जमा करते समय एक या दो नहीं, बल्कि तीन जिम्मेदार अधिकारी पैसों का मिलान करेंगे और तीनों के डिजिटल और भौतिक हस्ताक्षर होना अनिवार्य कर दिया गया है।















