दवाओं में घाटा हुआ तो शुरू किया पिस्टल का धंधा, सिर्फ 15 हजार के मुनाफे पर कानपुर-फतेहपुर में बांट दिए अवैध हथियार!

कानपुर (भास्कर ब्यूरो): ‘मुनाफा कम वसूलेंगे तो कस्टमर ज्यादा मिलेंगे’— व्यापार जगत की इसी थ्योरी पर चलते हुए फतेहपुर के एक दवा व्यापारी ने अवैध हथियारों का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया। दवाओं के धंधे में भारी नुकसान होने के बाद आरोपी ने मध्य प्रदेश के खंडवा से देसी पिस्टल लाकर बेचने का धंधा शुरू कर दिया। पिछले 10 सालों में कानपुर, फतेहपुर और आसपास के तमाम जनपदों में अवैध हथियार बेचकर उसने अपनी गृहस्थी संवारी, लेकिन सोमवार को उसकी यह काली कमाई धरी की धरी रह गई। पूर्वी जोन की महराजपुर पुलिस ने एक सटीक घेराबंदी कर शातिर सप्लायर को हथियार सप्लाई करने से ठीक पहले दबोच लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से तीन चमचमाती देसी पिस्टल बरामद की हैं।

‘जेल की दोस्ती’ ने फिर पहुंचाया सलाखों के पीछे

डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए बताया कि फतेहपुर का रहने वाला गैंगस्टर अतीक खान उर्फ लईक अहमद काफी समय से हथियारों की अंतरराज्यीय तस्करी में लिप्त था। शुरुआती दिनों में अतीक फतेहपुर में एक मेडिकल स्टोर चलाता था, लेकिन जब व्यापार में लगातार घाटा होने लगा तो उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया।

करीब पांच साल पहले जब अतीक फतेहपुर जेल में बंद था, तो उसकी बैरक में मध्य प्रदेश के खंडवा के कुख्यात हथियार तस्कर प्रशांत से मुलाकात हुई। जेल से बाहर आने के बाद प्रशांत ने अतीक का खंडवा में पूरा नेटवर्क सेट कराया। इसके बाद अतीक अक्सर अकेले ही पुलिस को चकमा देने के लिए अपनी बाइक से करीब 900 किलोमीटर का सफर तय कर खंडवा पहुंच जाता था और वहां से भारी मात्रा में अवैध असलहे लेकर आता था।

मुंगेर की 1 लाख वाली पिस्टल के सामने खंडवा का ‘सस्ता ऑफर’

पूछताछ में अतीक ने कबूला कि उसकी तस्करी के कामयाब होने का सबसे बड़ा राज उसकी कम कीमत थी। उसने अवैध हथियारों की मशहूर मंडी बिहार के मुंगेर को भी मात दे दी थी। जहां मुंगेर की बनी 9 एमएम की देसी पिस्टल कानपुर, लखनऊ और दिल्ली आते-आते 1 लाख रुपये तक की मिलती है, वहीं अतीक खंडवा से मात्र 30 हजार रुपये में पिस्टल खरीदकर लाता था और सिर्फ 15 हजार रुपये का मुनाफा कमाकर ग्राहकों को 45 हजार रुपये में ही पिस्टल मुहैया करा देता था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुंगेर की पिस्टल महंगी इसलिए होती है क्योंकि उसकी फिनिशिंग बेहतरीन होती है और राउंड फायरिंग के दौरान गोली फंसती नहीं है। इसके उलट खंडवा की पिस्टल कभी भी मौके पर धोखा दे सकती है, लेकिन कम दाम के चक्कर में लोग अतीक से ही हथियार खरीदना पसंद करते थे।

लेथ मशीन से बैरल और कानपुर के स्प्रिंग से तैयार होती है मौत

पुलिस की जांच में अवैध हथियारों के निर्माण को लेकर भी कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। पूछताछ में पता चला है कि अवैध फैक्ट्रियों में लेथ मशीन के जरिए बाजार में मिलने वाले बुलेट साइज को ध्यान में रखकर बैरल तैयार किया जाता है। इन हथियारों में इस्तेमाल होने वाले हाई-क्वालिटी स्प्रिंग कानपुर और देश के अन्य हिस्सों से विशेष ऑर्डर देकर मंगाए जाते हैं। इसके बाद अलग-अलग कारीगरों की टीम इनकी असेंबलिंग और फिनिशिंग का काम करती है। फिलहाल पुलिस अतीक से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि पिछले वर्षों में उससे पिस्टल खरीदने वाले अन्य 10 से ज्यादा सफेदपोशों और अपराधियों को भी बेनकाब किया जा सके।

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