करहल में गरजे प्रो. रामगोपाल यादव : राम मंदिर प्रकरण और WhatsApp बैन को लेकर सरकार को घेरा, उठाए गंभीर सवाल

मैनपुरी (करहल): जनपद मैनपुरी की हाई-प्रोफाइल करहल विधानसभा क्षेत्र में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी। सपा के कद्दावर नेता ने राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी के मामले, जांच की अजीब प्रक्रिया और अपने खुद के व्हाट्सएप (WhatsApp) ब्रॉडकास्ट पर लगी रोक को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए और कहा कि जनता अब सिर्फ दावों से नहीं बल्कि सीधी जवाबदेही चाहती है।

‘X’ पर बोलने की मिली सजा? रामगोपाल ने दिखाया बैन हुआ WhatsApp

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रो. रामगोपाल यादव ने सरकार पर उनकी आवाज दबाने का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर राम मंदिर मुद्दे पर अपनी बात रखने के ठीक बाद उनके व्हाट्सएप ब्रॉडकास्ट पर भी आगामी 31 जुलाई तक के लिए मैसेज भेजने पर रोक लगा दी गई है।

मीडिया के सामने अपने मोबाइल की स्क्रीन दिखाते हुए सपा सांसद ने कहा कि जैसे ही वह ब्रॉडकास्ट खोलते हैं, तुरंत प्रतिबंध का मैसेज फ्लैश होने लगता है, जिससे वह अपने कार्यकर्ताओं और जनता को कोई संदेश नहीं भेज पा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक गंभीर प्रहार बताया।

सीएम योगी के बयान पर पलटवार, बोले- राजनीति नहीं, निष्पक्ष जांच करे सरकार

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विपक्ष पर किए गए पलटवार का जवाब देते हुए प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि यह देश के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की अगाध आस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस महाघोटाले पर राजनीति करने और विपक्ष को कोसने के बजाय निष्पक्षता से जांच करानी चाहिए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना चाहिए। इस शर्मनाक घटना से देशवासियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए इसकी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच जरूरी है।

‘पहले SIT, फिर FIR’ – रामगोपाल यादव ने कानून की उल्टी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

जांच के तौर-तरीकों पर उंगली उठाते हुए प्रो. यादव ने एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा, “देश की सामान्य कानूनी प्रक्रिया यह कहती है कि पहले किसी अपराध की एफआईआर (FIR) दर्ज होती है और उसके बाद जरूरत पड़ने पर एसआईटी (SIT) का गठन किया जाता है। लेकिन इस मामले में सरकार ने अजब खेल किया; यहां पहले एसआईटी बना दी गई और एफआईआर बाद में दर्ज की गई।”

सपा महासचिव ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी आखिर किस रसूखदार और जिम्मेदार व्यक्ति पर एक्शन हुआ है? क्या किसी बड़े अधिकारी या संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया? क्या इस महापाप की किसी ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया?

बयानबाजी छोड़ तथ्य दिखाए सरकार, जनता चाहती है ठोस एक्शन

प्रो. रामगोपाल यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार अब केवल खोखली बयानबाजी और जुमलों को छोड़कर तथ्यों के आधार पर कड़ा एक्शन ले। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता अब सरकार के केवल दावों और हवाई बातों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि वह इस पूरे प्रकरण में असली दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और शासन-प्रशासन की सीधी जवाबदेही चाहती है।

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