CM योगी का बड़ा हंटर: संभल में सरकारी जमीन घोटाले पर PCS अधिकारी करन सिंह सस्पेंड, विभागीय जांच के आदेश!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में लापरवाही के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति के तहत एक और बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े आदेश पर शासन ने हाल ही में तहसीलदार से प्रमोट होकर उपजिलाधिकारी (SDM) बने पीसीएस (PCS) अधिकारी करन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही आरोपी अधिकारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

संभल की गुन्नौर तहसील में तैनाती के दौरान किया करोड़ों का भूमि घोटाला

यह पूरा मामला संभल जिले की गुन्नौर तहसील से जुड़ा हुआ है। शासन को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में संभल के जिलाधिकारी (DM) आईएएस अंकित खंडेलवाल ने बताया कि पीसीएस करन सिंह वर्ष 2017 में गुन्नौर के तहसीलदार पद पर तैनात थे। इस दौरान उन्होंने गुन्नौर तहसील के ग्राम सुखैला असदपुर में सरकारी नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर सरकारी भूमि के आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और हेरफेर की थी।

नियमों को ताक पर रख आवंटित कर दी ‘झाऊ’ और ‘रेता’ की प्रतिबंधित जमीन

डीएम संभल की जांच रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन तहसीलदार करन सिंह ने ग्राम सुखैला असदपुर में श्रेणी-5(3) के तहत दर्ज ‘झाऊ’ की भूमि और श्रेणी-6(4) के तहत दर्ज ‘रेता’ की सरकारी भूमि को अवैध रूप से चहेतों को आवंटित कर दिया था।

उत्तर प्रदेश भूमि राजस्व संहिता (UP Revenue Code) के कड़े प्रावधानों के अनुसार, इस विशिष्ट श्रेणी की सरकारी जमीनों का निजी आवंटन पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। यह जमीनें सरकारी उपयोग, जलभराव रोकने और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection) के लिए हमेशा आरक्षित रखी जाती हैं। डीएम की जांच में साफ हुआ कि तत्कालीन तहसीलदार ने आवंटन की किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और पात्रता मानकों की घोर अनदेखी करते हुए अपात्रों को लाभ पहुंचाया।

सस्पेंड कर प्रयागराज कमिश्नरी से किया संबद्ध, अन्य सहयोगियों पर भी गिरेगी गाज

जिलाधिकारी संभल की इस विस्फोटक जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने बिना कोई समय गंवाए पीसीएस अधिकारी करन सिंह को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें प्रयागराज मंडलायुक्त (Commissioner Office Prayagraj) कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

शासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत और सघन विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस विस्तृत जांच से इस बात का भी पता लगाया जाएगा कि सरकारी जमीन के इस अवैध बंदरबांट में तत्कालीन तहसीलदार के साथ और कौन-कौन से राजस्व कर्मी या भू-माफिया शामिल थे। प्रशासनिक हलकों में इस कड़े एक्शन से खलबली मच गई है और साफ संदेश दे दिया गया है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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