नई दिल्ली (रोहिणी): देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहां बुधवार शाम एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गई। इस भीषण हादसे में अब तक तीन लोगों की मलबे में दबकर मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे के नीचे दबी जिंदगियों को बचाने के लिए जिला प्रशासन और राहत एजेंसियों का रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी रातभर चलता रहा। पुलिस को आशंका है कि अभी भी कुछ लोग मलबे के नीचे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जिन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं।
शाम साढ़े चार बजे मलबे में तब्दील हुई चार मंजिला इमारत, बुलाई गई एनडीआरएफ
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे रोहिणी इलाके में निर्माणाधीन इमारत गिरने की खौफनाक सूचना कंट्रोल रूम को मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली नगर निगम (MCD), राजस्व विभाग, एंबुलेंस सेवा और टाटा पावर सहित तमाम संबंधित एजेंसियों की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य में कोई बाधा न आए और सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने सबसे पहले पूरे इलाके की घेराबंदी की और एहतियात के तौर पर आसपास की अन्य इमारतों को भी तुरंत खाली करा लिया।
मलबे से निकाले गए 4 लोग, डॉक्टरों ने 1 को घोषित किया मृत
हादसे के तुरंत बाद शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से अब तक चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से 42 वर्षीय राम किशोर को बेहद गंभीर हालत में मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि दो अन्य मृतकों के शवों की शिनाख्त और पहचान करने की विधिक प्रक्रिया जारी है। वहीं, घायलों में 35 वर्षीय रवि (पेशे से पीओपी कारीगर) और 32 वर्षीय सद्दाम शामिल हैं। सद्दाम के हाथ और पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है, जिनका इलाज नजदीक के बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है।
ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर मलबे में उतरे जांबाज, ऐसे बचाई गई जान
रोहिणी के पुलिस उपायुक्त (DCP) शशांक जायसवाल ने बताया कि बचाव दल ने अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे में फंसे एक व्यक्ति तक पहुंच बनाई, उसे पानी पिलाया और हौसला देते हुए सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीमें पहले से ही अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर मलबे के भीतर दाखिल हुई थीं, ताकि मलबे में फंसे लोगों का दम न घुटे और उन्हें तुरंत सांस लेने में मदद मिल सके।
एक अन्य फंसे हुए शख्स तक भी अस्पताल से विशेष रूप से मंगवाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर के जरिए तत्काल ऑक्सीजन पहुंचाई गई। रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन बिना किसी रुकावट के लगातार चलता रहे, इसके लिए मौके पर बड़े-बड़े जनरेटर और फ्लड लाइट्स की अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी।
मलबे में प्रॉपर्टी मालिक के भी दबे होने की आशंका, मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश
पुलिस जांच में सामने आया है कि जमींदोज हुई इस विवादित इमारत की संपत्ति राम दुआ की पत्नी मंजू और विनोद की पत्नी ऋतिका के संयुक्त स्वामित्व (Joint Ownership) में है। स्थानीय लोगों के अनुसार आशंका जताई जा रही है कि खुद राम दुआ भी इस हादसे के वक्त वहीं मौजूद थे और वे भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। इसके अलावा चार से पांच अन्य मजदूरों के भी मलबे के नीचे दबे होने की संभावना है।
इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गहरा दुख जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों को मौके पर एक्टिव कर दिया गया था। उन्होंने आला अधिकारियों को मलबे को हटाने और पीड़ितों को हरसंभव सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मलबे को तेजी से हटाने के लिए कई निजी जेसीबी (JCB) मशीनों और दो विशाल हाइड्रा क्रेन की मदद ली है।












