Sitapur : मिशन स्कूल पर हाई कोर्ट ने दिया यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

 

  • जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर हाई कोर्ट ने लगाई लगाम, 20 जुलाई को होगी अगली बड़ी सुनवाई

Sitapur : जिला मजिस्ट्रेट के एक आदेश के बाद सीतापुर के खैराबाद स्थित छावनी कदीम में हड़कंप मच गया है, जहां पिछले 150 वर्षों से संचालित शैक्षणिक संस्थान मिशन स्कूल में खाली पड़ी नजूल की जमीन को खाली कराने को लेकर दो दिनों तक बुलडोजर की कार्रवाई हुई। इस स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने रविवार को विशेष इन-चेंबर सुनवाई करते हुए प्रशासन के कदमों पर फिलहाल रोक लगा दी है और विवादित भूमि पर पूरी तरह से यथास्थिति (स्टैटस को) बनाए रखने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

न्यायाधीश आलोक माथुर और न्यायाधीश अमिताभ कुमार राय की विशेष पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उस गुहार पर तत्काल संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि जिस जमीन पर यह ऐतिहासिक संस्थान खड़ा है, उसे राज्य सरकार के अभिलेखों में गलत तरीके से नजूल भूमि घोषित कर दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं के वकील रोहित त्रिपाठी ने कोर्ट के सामने अकाट्य तर्क देते हुए स्पष्ट किया कि छावनी कदीम, परगना-खैराबाद की यह 3.562 हेक्टेयर जमीन साल 1862 में ही याचिकाकर्ताओं के पूर्वजों द्वारा खरीदी गई थी, जिसके बाद से यहां लगातार शिक्षा की अलख जगाई जा रही है। ऐसे में 24 जून 2026 को जारी किया गया बेदखली या ध्वस्तीकरण का आदेश गलत है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता निशांत शुक्ला ने दलील दी कि प्रशासन ने शैक्षणिक गतिविधियों या चर्च वाले मुख्य हिस्से को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि केवल अन्य अतिक्रमण वाली भूमि को वापस अपने कब्जे में लिया है। सरकारी पक्ष के अनुसार, नगर पालिका परिषद सीतापुर ने पहले ही कुछ हिस्से पर अपना कब्जा ले लिया था। मामले की संवेदनशीलता और इस बात को देखते हुए कि इस संपत्ति से जुड़ा एक सिविल वाद (मुकदमा नंबर 34 वर्ष 2017) पहले से ही सीतापुर के सिविल जज सीनियर डिवीजन के समक्ष लंबित है, हाई कोर्ट ने इस विवाद को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार कब्जे में ली गई जमीन की प्रकृति में किसी भी तरह का बदलाव नहीं करेगी और दोनों पक्ष अगली सुनवाई तक मौके पर पूरी तरह शांति और यथास्थिति बनाए रखेंगे। मुख्य स्थायी अधिवक्ता के कार्यालय को तत्काल प्रभाव से यह आदेश बिना प्रमाणित प्रति का इंतजार किए संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली बड़ी सुनवाई 20 जुलाई 2026 को शीर्ष दस मुकदमों की सूची में शामिल कर की जाएगी।

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