नई दिल्ली। नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर सड़क से संसद तक जारी भारी हंगामे के बीच गुरुवार (23 जुलाई) देर रात चार बड़े घटनाक्रम देखने को मिले। छात्रों के आक्रोश और विपक्षी दलों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ न्यायिक और विधायी स्तर पर तेजी से कदम उठाए हैं।
महज 90 मिनट के भीतर हुए इन घटनाक्रमों के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या देश भर में जारी यह गतिरोध थम पाएगा।
1. उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी हटाए गए, नरेश पाल गंगवार को कमान
पेपर लीक विवाद और परीक्षा आयोजन में हुई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। उनकी जगह 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है।
2. पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आश्वासन के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दिया है। तीस हजारी कोर्ट की मीडिएशन सेंटर इंचार्ज रहीं जज अनु ग्रोवर बालीगा का तबादला राउज एवेन्यू कोर्ट में किया गया है, जहां वे स्पेशल जज के रूप में इन सभी मामलों की रोजाना आधार पर सुनवाई करेंगी।
3. पीएम मोदी का देर रात वीडियो संदेश: आएगा सख्त कानून
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात 11:52 बजे एक वीडियो संदेश जारी कर देश के युवाओं और अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया। पीएम ने कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के लिए एक नया और सख्त कानून ला रही है।
“इस कानून के मसौदे (Draft) पर कैबिनेट बैठक में चर्चा कर अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इसे आगामी संसद सत्र में पेश कर जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास होगा।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
4. सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल में तोड़ा 26 दिनों का अनशन
लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26वें दिन अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति में उन्होंने जूस पीकर भूख हड़ताल खत्म की। विभिन्न दलों के 65 सांसदों की अपील और सरकार से वार्ता के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया तथा देशवासियों से शांति और अहिंसा बनाए रखने की अपील की।
संसद और सड़क पर क्या असर होगा?
वर्तमान में जंतर-मंतर पर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है और विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही भी बाधित हो रही है। आधी रात को उठाए गए इन प्रशासनिक, कानूनी और विधायी कदमों को सरकार की ओर से आंदोलन को शांत करने और अभ्यर्थियों का भरोसा वापस जीतने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।













