
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी चुनावी रणनीति और गठबंधन के फॉर्मूले के संकेत दे दिए हैं। रायबरेली में आयोजित ‘PDA रथ यात्रा’ के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन रहेगा, लेकिन सीटों का बंटवारा राजनीतिक दावों के बजाय उम्मीदवारों की जीत की क्षमता (Winability) के आधार पर होगा। गौरतलब है कि रायबरेली कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है और यहीं से अखिलेश यादव ने सपा के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत की है।
‘सीटों का आंकड़ा नहीं, जीत तय करेगा उम्मीदवार’
अखिलेश यादव ने गठबंधन में सीटों के गणित पर बात करते हुए कहा कि आगामी चुनाव में सीटों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि कौन सी पार्टी या प्रत्याशी जीत दर्ज कर सकता है।
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जीत ही एकमात्र पैमाना: उन्होंने कहा, “गठबंधन भी होगा और चुनौती भी होगी। हमारे लिए बात केवल सीटों की नहीं, बल्कि जीतने वाली सीटों की होगी। जो सीट जीत सकता है, वही उस पर चुनाव लड़े।”
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2024 का प्रदर्शन दोहराने की रणनीति: अखिलेश ने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर भाजपा को करारी शिकस्त दी थी। 2027 में भाजपा की स्थायी चुनावी हार सुनिश्चित करने के लिए इसी जिताऊ फॉर्मूले पर काम किया जाएगा।
PDA के नए आयाम: ‘A’ में मुस्लिम, सिख, बौद्ध के साथ शामिल हुई ‘आधी आबादी’
भाजपा के खिलाफ अपने सामाजिक गठजोड़ ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का दायरा बढ़ाते हुए अखिलेश ने महिलाओं को भी इसमें प्रमुखता से जोड़ा।
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‘आधी आबादी’ की भागीदारी: उन्होंने कहा कि PDA में ‘A’ का अर्थ केवल मुस्लिम, सिख, बौद्ध या पारसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ‘आधी आबादी’ यानी महिलाएं भी शामिल हैं।
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समुदायों को न्याय का वादा: गाजीपुर और अन्य जिलों के कथित मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सपा विश्वकर्मा, लोध, बिंद और पासी जैसे सभी उपेक्षित व पीड़ित समाजों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करेगी।
बुलडोजर कार्रवाई और चुनाव आयोग पर करारा हमला
प्रशासनिक कार्रवाई और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सपा प्रमुख ने बेहद तल्ख रुख अपनाया:
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बुलडोजर राजनीति का अंत: अखिलेश ने आरोप लगाया कि PDA से जुड़े वर्गों को सरकार द्वारा चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बुलडोजर राजनीति करने वाले लोग PDA के जनाक्रोश से बच नहीं पाएंगे और 2027 का जनादेश ऐसी राजनीति को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।
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चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप: 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि कथित ‘वोट चोरी’ के कारण जनता का चुनाव आयोग पर से भरोसा उठ चुका है। उन्होंने कहा कि यदि 2022 में वोट चोरी नहीं हुई होती, तो प्रदेश में सपा की सरकार बनती।
समान नागरिक संहिता (UCC) और सामाजिक मुद्दों पर घेरा
अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कई प्रमुख बिंदु उठाए:
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पहले नागरिकों में समानता जरूरी: प्रस्तावित UCC पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में कानून थोपने से पहले सभी नागरिकों के बीच सामाजिक और आर्थिक बराबरी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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धार्मिक सौहार्द और शिक्षा: काशी और सहारनपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने भाजपा पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार बनने पर बंद किए गए सभी प्राथमिक विद्यालयों को दोबारा खोला जाएगा।
इसके अतिरिक्त, रायबरेली से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने भी जिले की सभी विधानसभा सीटों पर सपा के मजबूत जनाधार का दावा पेश किया। अखिलेश ने अंत में अपनी ‘PDA रथ यात्रा’ की तुलना कुरुक्षेत्र के धर्मयुद्ध से करते हुए सकारात्मक राजनीति के साथ आगे बढ़ने का संकल्प जताया।













