नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में चल रहा राजनीतिक पारा चढ़ता ही जा रहा है। शुक्रवार को संसद से लेकर जंतर-मंतर तक केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। विपक्षी दल कांग्रेस सहित अन्य घटक दल और छात्र संगठन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित हुई।
जंतर-मंतर पर CJP का धरना, अभिजीत दिपके बोले- ‘इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं’
संसद के साथ-साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध की गूंज सुनाई दे रही है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। दिपके ने मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों बाद भूख हड़ताल समाप्त करने पर राहत जताई और कहा कि देश के लिए उनकी जान बेहद कीमती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ वार्ता केवल किसी तटस्थ स्थान पर ही होगी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम पर कोई समझौता नहीं होगा।
संसद के मकर द्वार पर विपक्ष का हल्लाबोल, प्रियंका गांधी और खरगे रहे मौजूद
संसद परिसर के अंदर भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही रही। मकर द्वार के पास कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष और वामपंथी दलों के नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया। विपक्षी सांसदों ने ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगाए। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री एक तरफ जवाबदेही की बात करते हैं और दूसरी तरफ विवादों में घिरे अधिकारियों को उच्च शिक्षा सचिव का पद दे दिया जाता है। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र पर तंज कसते हुए कहा कि जब बीमारी जड़ में है, तो केवल ऊपरी इलाज से बात नहीं बनने वाली।
हंगामे की भेंट चढ़ी संसद की कार्यवाही, कारगिल शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि
विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। हालांकि, सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 26 जुलाई ‘कारगिल विजय दिवस’ का उल्लेख किया, जिसके बाद पूरे सदन ने देश के अमर शहीदों की स्मृति में मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्ष नीट मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर वेल में आकर नारेबाजी करने लगा। अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने और बाद में नियमों के तहत चर्चा की अपील की, लेकिन शोर-शराबा न थमने पर सदन को स्थगित करना पड़ा।















