NEET विवाद में बड़ा मोड़: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, CJP ने 36 दिनों बाद जंतर-मंतर पर खत्म किया आंदोलन; जानिए क्या है सरकार का नया प्लान ?

नई दिल्ली। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद और देशव्यापी छात्र असंतोष के बीच शनिवार को भारतीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आए। हफ्तों तक चले उग्र विरोध प्रदर्शनों, सीबीआई (CBI) जांच और राजनीतिक दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के महज कुछ ही घंटों भीतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया।

इधर, केंद्र सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बीच तीसरे दौर की मैराथन वार्ता के बाद समझौता हो गया। सरकार द्वारा मुख्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद CJP ने जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से जारी अपने आंदोलन को समाप्त करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया।

केंद्र और CJP के बीच बनी सहमति: FIR वापसी और मुआवजे पर मुहर

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ताओं—सौरव दास और आशुतोष रंका—ने कहा कि सरकार के सकारात्मक रवैये और तय समय-सीमा के भरोसे पर वे “अच्छी नीयत” के साथ आंदोलन समाप्त कर रहे हैं।

वार्ता में बनी मुख्य सहमतियां:

  • केस व FIR की वापसी: प्रदर्शनकारी छात्रों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज की गई सभी एफआईआर और कानूनी केस वापस लिए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र के खिलाफ बदले की कार्रवाई नहीं होगी।

  • पीड़ित परिवारों को मुआवजा: परीक्षा लीक विवाद और तनाव के चलते जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को नियमानुसार आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

  • परीक्षा सुधारों पर विचार: एग्जामिनेशन सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए CJP के 5-पॉइंट चार्टर पर सरकार दीर्घकालिक सुधारों के तहत विचार करने के लिए सहमत हो गई है।

36 दिन बाद जंतर-मंतर खाली, दिल्ली मेट्रो के स्टेशन फिर से खुले

CJP का यह प्रदर्शन 20 जून से जंतर-मंतर पर जारी था। इस आंदोलन को उस वक्त बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली जब प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। 26 दिनों के उपवास के बाद वांगचुक ने तबीयत बिगड़ने पर सरकार के लिखित आश्वासन के बाद अनशन तोड़ा था, लेकिन CJP शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक आंदोलन पर अड़ी रही।

आंदोलन समाप्त होने और जंतर-मंतर खाली होने के तुरंत बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट समेत सुरक्षा कारणों से बंद किए गए सभी 18 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट आम जनता के लिए फिर से खोल दिए।

प्रह्लाद जोशी ने संभाली कमान, सोमवार को लोकसभा में पेश होगा सख्त संशोधन बिल

शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने पर प्रह्लाद जोशी ने कहा, “मैं यह जिम्मेदारी पूर्ण कर्तव्य निष्ठा और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता और लगन से शिक्षा क्षेत्र के सुधारों को आगे बढ़ाऊंगा।”

वहीं, परीक्षा प्रणाली में बड़ी सेंधमारी और पेपर लीक जैसी घटनाओं को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ पेश करने जा रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को पटल पर रखेंगे।

प्रस्तावित कानून के मुख्य बिंदु:

  • संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान।

  • मामलों की तेज पड़ताल के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन और 2 महीने में जांच पूरी करने की बाध्यता।

  • मुकदमों के त्वरित निस्तारण हेतु स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई का नियम।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: विपक्ष ने बताया “छात्रों के भविष्य की जीत”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे “भारत के भविष्य और छात्रों के संघर्ष की बड़ी जीत” करार दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार को अब निष्पक्ष जांच के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली में बिना किसी देरी के बुनियादी सुधार लागू करने चाहिए।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha