नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में सत्ता पक्ष ने अपनी रणनीति को धार दे दी है। मंगलवार को संसद पुस्तकालय में आयोजित एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गठबंधन के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। इस बैठक में जहां सत्र के बचे हुए तीन दिनों के कामकाज पर मंथन हुआ, वहीं संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने तिरंगा लहराकर और पोस्टरों के जरिए विपक्ष पर जोरदार हमला बोला।
‘मंगल मिलन’ में रणनीति: वंदे मातरम के नारों के साथ हुआ आगाज
एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक, जिसे अब ‘मंगल मिलन’ के नाम से जाना जाता है, आज बेहद खास रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं ने तिरंगा थामकर देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य गठबंधन के सभी सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना और सदन के भीतर विधायी कार्यों को गति देना है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी सांसद सदन की कार्यवाही में अपनी शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे, ताकि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को हंगामे के बावजूद पारित करा सके।
झारखंड मुद्दे पर विपक्ष को घेरा, कांग्रेस पर लगा पलायन का आरोप
संसद परिसर में भाजपा और एनडीए सांसदों ने झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों पर हो रहे कथित अत्याचार का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। सांसदों ने अपने हाथों में पोस्टर ले रखे थे, जिनमें संदेश लिखा था कि सरकार छात्रों के आंदोलन और झारखंड की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल इससे भाग रहे हैं।
सांसदों का आरोप है कि विपक्ष संसद में केवल हंगामा कर रहा है और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा से बच रहा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस की मंशा चर्चा करने की नहीं, बल्कि केवल संसद की कार्यवाही को बाधित करने की है।
बैठक में दिखी विकास की झलक और सरकार की उपलब्धियां
‘मंगल मिलन’ की पिछली बैठकों की तरह ही इस बार भी सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा हुई। भाजपा सांसदों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि किस प्रकार भारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है। बैठक में इस बात पर गर्व जताया गया कि सरकार की नीतियों के चलते 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।
सांसदों ने इस बात पर भी जोर दिया कि रोजगार के मोर्चे पर भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में काफी बेहतर है और सरकार लगातार युवाओं को अवसर मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मनोज तिवारी और दिनेश शर्मा जैसे वरिष्ठ सांसदों ने भी जोर देकर कहा कि एनडीए गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सदन के बचे हुए तीन दिनों में सरकार अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए तैयार है।
क्या है ‘मंगल मिलन’ का महत्व?
‘मंगल मिलन’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दलों (जैसे शिवसेना, लोजपा, टीडीपी, जदयू आदि) के बीच समन्वय का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसका मकसद है:
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रचनात्मक चर्चा: सदन के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों को मजबूती से रखना।
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तालमेल: सहयोगी दलों के बीच अहम मुद्दों पर आम सहमति बनाना।
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जिम्मेदारी तय करना: प्रमुख बहस में कौन सा नेता कब और क्या बोलेगा, इसकी योजना तैयार करना।
सत्र के अंतिम तीन दिन सत्ता पक्ष के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, और आज की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए सरकार विपक्ष के किसी भी व्यवधान का जवाब अपने काम और एकजुटता से देने के लिए तैयार है।










