अयोध्या राम मंदिर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: नरपत डुकिया बने प्रबंधन प्रमुख, दान किए गए आभूषणों की सुरक्षा के लिए SIT की कड़ी निगरानी

अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि मंदिर की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव किया है। मंदिर में चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़ी हालिया घटनाओं के मद्देनजर, ट्रस्ट ने अब कमान नए हाथों में सौंपते हुए सीए नरपत डुकिया को मंदिर संचालन एवं प्रबंधन का नया प्रमुख (Head of Operations & Management) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित करने के लिए इंजीनियर जगदीश आफले को सचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

SIT की जांच: दान किए गए आभूषणों और रसीदों का भौतिक मिलान

मंदिर परिसर में चढ़ावा प्रबंधन और सुरक्षा के मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच का दायरा काफी विस्तृत कर दिया है। एसआईटी ने विशेष रूप से गर्भगृह के पास स्थित उस ‘विशेष लॉकर’ का भौतिक सत्यापन किया है, जिसमें भगवान रामलला को समर्पित बहुमूल्य आभूषण सुरक्षित रखे जाते हैं।

इस प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पारदर्शी मिलान: एसआईटी ने मंदिर के ट्रस्ट अभिलेखों, श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दान रसीदों और लॉकर में मौजूद वास्तविक आभूषणों का बिंदुवार मिलान किया।

  • सत्यापन प्रक्रिया: जिन भी भक्तों ने स्वर्ण या रजत आभूषण दान किए थे, उनकी रसीदों के आधार पर लॉकर में रखे आभूषणों की भौतिक उपस्थिति की पुष्टि की गई है।

  • तौल और ऑडिट: मंदिर की प्रक्रिया के अनुसार, दान की गई प्रत्येक वस्तु को पहले इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर तौला जाता है। एसआईटी अब इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और विस्तृत ऑडिट कर रही है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की विसंगति की गुंजाइश न रहे।

त्रि-स्तरीय सुरक्षा: रामलला का खजाना है अभेद्य

मंदिर के गर्भगृह के पास स्थित आभूषणों के लॉकर की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत चाक-चौबंद है। इसे खोलने के लिए एक जटिल और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली (त्रि-स्तरीय) का पालन किया जाता है। इस लॉकर को खोलने के लिए तीन अलग-अलग चाबियों की अनिवार्य आवश्यकता होती है, जो इन तीन अधिकारियों के पास रहती हैं:

  1. नरपत डुकिया: वर्तमान मंदिर संचालन एवं प्रबंधन प्रमुख।

  2. शैलेंद्र शुक्ल: जिनके पास दूसरी चाबी रहती है।

  3. विंदेश्वरी सिंह: जिनके पास तीसरी चाबी रहती है।

प्रशासनिक नियमों के अनुसार, जब तक इन तीनों चाबियों का एक साथ समन्वय नहीं होता, तब तक लॉकर को खोलना तकनीकी रूप से असंभव है। यह सुरक्षा व्यवस्था खजाने की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

नई नियुक्तियां और प्रशासनिक सुधारों का रोडमैप

राम मंदिर के संचालन को अधिक पेशेवर और सुव्यवस्थित बनाने के लिए ट्रस्ट ने स्पष्ट कार्य विभाजन किया है:

  • नरपत डुकिया (प्रबंधन प्रमुख): इन्हें मंदिर की समग्र प्रशासनिक व्यवस्था, विभागों के बीच तालमेल और ट्रस्ट के निर्णयों को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. कृष्ण मोहन (अंतरिम महासचिव) के करीबी माने जाने वाले डुकिया के साथ आचार्य इंद्रदेव मिश्र को सहयोगी के तौर पर नियुक्त किया गया है। उनका यह कार्यकाल दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

  • जगदीश आफले (सचिव): राम मंदिर के खातों का प्रबंधन संभाल रहे इंजीनियर जगदीश आफले को अब सचिव के रूप में कार्यभार दिया गया है। आगामी 2 सितंबर को आयोजित होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इनकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

इस नई प्रशासनिक व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठानों की पवित्रता को बनाए रखते हुए प्रशासनिक प्रबंधन को अलग रखना है, ताकि मंदिर के संचालन में पारदर्शिता और समन्वय बना रहे।

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