
- प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने यूपी एटीएस टीम के लिए 2 लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की
यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी और हेड कांस्टेबल पर चलाई गोली, बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई जान
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार की सख्त नीति के बीच यूपी एटीएस ने रविवार काे वाराणसी में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरदार जी को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। लगभग 20 वर्षों से फरार चल रहे बृजेश गंझू पर झारखंड पुलिस और एनआईए ने कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, आगजनी, आपराधिक षड्यंत्र और लोकसेवकों पर हमले समेत 50 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। इसमें आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले भी शामिल हैं। वहीं, डीजीपी राजीव कृष्ण ने मुठभेड़ में शामिल एटीएस की टीम को 2 लाख का पुरस्कार देने की घोषणा की है।
यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि झारखंड के नक्सली उत्तर प्रदेश की सीमा में आने वाले हैं। टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू भेष बदलकर अलग-अलग राज्यों में छिपते हुए सुरक्षा एजेंसियों से बच रहा है और अपने साथी के साथ वाराणसी की ओर आ रहा है। सूचना के आधार पर एटीएस की टीमों को वाराणसी से जुड़े मिर्जापुर और सोनभद्र के सीमावर्ती क्षेत्रों व संभावित आवागमन मार्गों पर सक्रिय किया गया।
एटीएस को देखते ही शुरू कर दी फायरिंग
रविवार की भोर में सूचना मिली कि बृजेश वाराणसी में प्रवेश कर चुका है और रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान की ओर बढ़ रहा है। एटीएस की टीमें लंका मैदान के आस-पास तैनात हो गईं। इसी दौरान जीटी रोड की तरफ से एक मोटरसाइकिल पर दो लोग आते दिखाई दिए। उन्हें रोकने का प्रयास किया गया तो मोटरसाइकिल सवारों ने एटीएस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे डिप्टी एसपी विपिन कुमार राय और मुख्य आरक्षी नितेंद्र कृष्ण को भी गोली लगी, लेकिन दोनों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उनकी जान बच गई। जवाबी कार्रवाई में बृजेश गंझू को भी गोली लगी और उसका दूसरा साथी मौके से भाग निकला। घायल बृजेश को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बृजेश गंझू पर 25 लाख रुपये झारखंड पुलिस और 5 लाख रुपये का इनाम एनआईए ने जारी किया था। वह एनआईए के केस आरसी-6/2018 और आरसी-22/2018 में भी वांछित था। इसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आपराधिक षड्यंत्र, रंगदारी, आगजनी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लोकसेवकों पर हमला करने, अवैध हथियार और विस्फोटक रखने से जुड़े 50 से अधिक मामले दर्ज थे। बृजेश के खिलाफ यूए(पी)ए यानि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं में भी मुकदमे दर्ज थे।
सीपीआई (माओवादी) से टीएसपीसी तक पहुंचा
बृजेश पहले सीपीआई (माओवादी) से जुड़ा था और बाद में टीएसपीसी का सुप्रीमो बनकर हिंसक नक्सली गतिविधियों में सक्रिय हो गया। मुठभेड़ के बाद मौके से दो पिस्टल, एक कार्बाइन, भारी मात्रा में कारतूस और एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
वहीं यूपी एटीएस इससे पहले टीएसपीसी के सब-जोनल कमांडर उमेश उर्फ नगीना को भी गिरफ्तार कर चुकी है, जिस पर झारखंड में पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। नक्सली कमांडर बृजेश गंझू मूल रूप से चतरा जिले के लूटू गांव का रहना वाला था। हालांकि, काफी समय से ठिकाने और नाम बदल-बदल कर रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में उसके गोपाल सिंह भोक्ता, दुलारचंद गंझू, रंजन, फुलचंद गंझू और सरदार जैसे नाम भी दर्ज हैं। बृजेश के पिता पंचू गंझू की काफी पहले ही मौत हो चुकी है। वह लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। सिर्फ चतरा में ही उस पर 39 केस दर्ज थे। पहले वह बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से वसूली करता था। उसने अपना नेटवर्क बिहार के कुछ हिस्सों में भी फैलाया। वर्ष 2010 में वह लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया चुना गया था।









