
हरदोई। प्रदेश की कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए जनपद हरदोई के विकास खंड टड़ियावां से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। ब्लॉक मुख्यालय पर शनिवार दोपहर ऑन ड्यूटी काम कर रहे पंचायत सचिव पर ग्राम पंचायत अलीनगर के प्रधान प्रतिनिधि ने समर्थकों के साथ मिलकर सरकारी कार्यालय में घुसकर हमला बोल दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि “जब सरकारी दफ्तर में ही कर्मचारी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या?”
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकास खंड टड़ियावां में कार्यरत पंचायत सचिव रजनीश वर्मा शनिवार दोपहर लगभग 3:00 बजे अपने ब्लॉक मुख्यालय स्थित कार्यालय में विभागीय कार्य निपटा रहे थे। इसी दौरान ग्राम पंचायत अलीनगर के प्रधान प्रतिनिधि (प्रधान सोनिया शुक्ला के पति) अचल प्रकाश शुक्ला अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और किसी पुराने भुगतान को लेकर बहस करने लगे।
देखते ही देखते बहस हाथापाई और हमले में बदल गई। दबंगों के हिंसक रूप को देखते हुए रजनीश वर्मा ने शौचालय (प्रसाधन कक्ष) में भागकर किसी तरह खुद को बंद किया और अपनी जान बचाई, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पंचायत सचिव रजनीश वर्मा ने बताया कि अलीनगर की प्रधान सोनिया शुक्ला के प्रशासनिक अधिकार शासन द्वारा पहले ही सीज (ज़ब्त) किए जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रधान पति अचल प्रकाश शुक्ला लगातार पुराने कार्यों का भुगतान करने के लिए अनुचित दबाव बना रहे थे।रजनीश वर्मा का कहना है कि जब प्रधान के अधिकार पहले ही सीज हैं, तो नियमों के विरुद्ध जाकर भुगतान करना संभव नहीं है। अचल शुक्ला लगातार भुगतान न करने पर अंजाम भुगतने की धमकियां दे रहे थे।” वहीं, क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि रजनीश वर्मा बेहद सरल, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्हें जबरन निशाना बनाया गया। घटना की सूचना मिलते ही खंड विकास अधिकारी (BDO) इन्द्रसेन और एडीओ पंचायत सुधीर सिंह मौके पर पहुंचे। हालांकि, तब तक अचल शुक्ला और उनके समर्थक मौके से फरार हो चुके थे।
घटना के बाद जब पुलिस जांच के लिए पहुंची और ब्लॉक मुख्यालय पर लगे CCTV कैमरों की जांच करनी चाही, तो प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा कारनामा सामने आया! ब्लॉक में कैमरे तो लगे थे, लेकिन वे बिना रिचार्ज के सिर्फ दिखावे के शो-पीस साबित हुए। टड़ियावां के प्रभारी निरीक्षक इख्तियार हुसैन ने बताया कि पीड़ित पंचायत सचिव की तहरीर पर दो नामजद और कुछ अज्ञात लोगों पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और आगे की कार्यवाई प्रचलित है। वहीं क्षेत्राधिकारी हरियावां लक्ष्मीकांत गौतम ने बताया कि अभियोग पंजीकृत कर पूछताछ के लिए एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया गया है। लेकिन समाचार लिखे जाने तक जानकारी हुई की मुकदमा पंजीकृत होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहें हैं और कानून को ठेंगा दिखा रहें हैं।
अब बड़ा सवाल यह कि जब करोड़ों रुपये सुरक्षा और डिजिटल निगरानी पर बहाए जा रहे हैं, तो ज़मीन पर स्थिति शून्य क्यों है? यदि भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट जाए, तो बिना चालू कैमरों के इसका जिम्मेदार कौन होगा?
दिनदहाड़े सरकारी कार्यालय में घुसकर ऑन-ड्यूटी अधिकारी पर हमला करना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि कानून के इकबाल को खुली चुनौती है। इस घटना से पूरे ब्लॉक और प्रशासनिक अमले में भारी आक्रोश व्याप्त है। अब सवाल उठा रहा है कि क्या प्रशासन ऐसे दबंगों पर कठोर बुलडोजर-रासुका जैसी कार्रवाई करेगा? या फिर लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?









