आबकारी नीति केस में CBI को झटका! केजरीवाल-सिसोदिया ने हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई पर ही उठाया सवाल

Arvind Kejriwal CBI | CBI Liquor Policy Scam | 'जज ने समझा ही नहीं', केजरीवाल-सिसोदिया को छोड़ेगी नहीं सीबीआई, दिल्ली हाईकोर्ट में गिनाई सारी गलती - News18 हिंदी नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका का विरोध किया है। दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में आवेदन दाखिल कर सीबीआई की रिवीजन याचिका को खारिज करने की मांग की है।

ये आवेदन सीबीआई की उस रिवीजन याचिका के जवाब में दाखिल किए गए हैं, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसी ने 27 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को डिस्चार्ज किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।

सीबीआई की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर उठाई आपत्ति

केजरीवाल और सिसोदिया ने अपनी दलीलों में सीबीआई की याचिका की सुनवाई योग्य होने पर शुरुआती आपत्ति जताई है। दोनों का कहना है कि जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटे बाद रिवीजन याचिका दाखिल कर दी, लेकिन उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि निचली अदालत के आदेश में कानूनी तौर पर ऐसी कौन-सी गंभीर खामी थी, जिसके आधार पर उसे चुनौती दी जा रही है।

मनीष सिसोदिया की ओर से दाखिल आवेदन में कहा गया है कि सीबीआई की याचिका व्यापक आरोपों तक सीमित है। इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किसी विशेष आरोपी के मामले में ट्रायल कोर्ट ने किस सबूत को नजरअंदाज किया या किस आधार पर न्यायिक विवेक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।

‘सीबीआई ने कोई ठोस सामग्री पेश नहीं की’

सिसोदिया की ओर से दायर आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को गलत या विकृत साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत, दस्तावेज या अन्य सामग्री पेश नहीं की है।

दोनों नेताओं का तर्क है कि केवल ट्रायल कोर्ट के फैसले से असहमति होना रिवीजन याचिका का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। उनके मुताबिक, जांच एजेंसी को यह बताना होगा कि निचली अदालत के आदेश में वास्तविक कानूनी या न्यायिक त्रुटि कहां हुई।

27 फरवरी को 23 आरोपियों को किया गया था डिस्चार्ज

बता दें कि 27 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सीबीआई की याचिका पर पहले न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ में सुनवाई हुई थी। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट के कुछ निर्देशों पर रोक भी लगाई थी।

बाद में आरोपियों की ओर से न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ कथित पक्षपात को लेकर आपत्तियां उठाई गईं। इसके बाद मामले की सुनवाई को लेकर भी न्यायिक स्तर पर बदलाव हुआ।

18 अगस्त को हो सकती है अगली सुनवाई

केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल आवेदन पर दिल्ली हाईकोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है। अब अदालत के सामने शुरुआती तौर पर यह सवाल होगा कि सीबीआई की रिवीजन याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और क्या ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश में ऐसी कोई गंभीर कानूनी खामी है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।

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