“पानी की हर बूंद रेड लाइन”… शहबाज के बयान से क्यों बढ़ा भारत-पाक तनाव?

What is Indus Water Treaty in Hindi, Sindhu Jal Samjhauta Kya Hai - सिंधु  जल संधि क्या है, जिसे भारत ने तोड़ा यह पाकिस्तान के साथ नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत को सिंधु जल संधि को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में शरीफ ने कहा कि सिंधु नदी के पानी की ‘हर बूंद’ पाकिस्तान के लिए रेड लाइन है। उन्होंने भारत से अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहा और चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर पाकिस्तान ‘सीधा जवाब’ देगा।

शरीफ ने भारत पर शांति का दुश्मन होने का आरोप भी लगाया। हालांकि, भारत के खिलाफ इस तीखे रुख के बीच पाकिस्तान खुद कई गंभीर आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी हिंसा, बलूचिस्तान में असंतोष, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में विरोध प्रदर्शन, मानवाधिकारों को लेकर आरोप और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में मौजूदगी ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ा तनाव

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था।

भारत का कहना है कि जिन परिस्थितियों में यह संधि हुई थी, वे अब बदल चुकी हैं। नई दिल्ली ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई होने तक संधि अपने मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ सकती।

शहबाज शरीफ ने भारत के इस कदम को एकतरफा और गैरकानूनी बताते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने पानी के अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पानी की हर बूंद पाकिस्तान के लिए रेड लाइन है।

बलूचिस्तान में स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार की अपील

भारत को चेतावनी देने के साथ पाकिस्तान के सामने घरेलू स्तर पर भी असंतोष की चुनौती है। बलूचिस्तान में राष्ट्रवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के बजाय ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाने की अपील की है।

बलूच नेता और कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने दुनिया भर के बलूच लोगों से स्वतंत्रता दिवस समारोहों का बहिष्कार करने और विरोध के प्रतीक के रूप में काले झंडे तथा काली पट्टी का इस्तेमाल करने की अपील की है।

बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस्लामाबाद क्षेत्र में सैन्य दमन कर रहा है। सुराब इलाके में कथित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। हालांकि, इन घटनाओं में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच ने सुराब में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की कथित बमबारी की आलोचना की है। उन्होंने नागरिकों, जिनमें बच्चों के शामिल होने का दावा है, के मारे जाने और घायल होने की बात कही है। अन्य बलूच कार्यकर्ताओं ने भी नागरिक इलाकों में सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।

खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद बड़ी चुनौती

पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति भी सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। खैबर पख्तूनख्वा के स्वात में काबल पुलिस स्टेशन के पास आत्मघाती हमले में 17 लोगों की मौत और 27 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। मृतकों में सात पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं।

यह हमला ऐसे समय हुआ जब क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था। घटना ने पाकिस्तान में आतंकवादी हिंसा पर नियंत्रण के सरकार के दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

PoJK में विरोध, बल प्रयोग के आरोप

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में भी असंतोष जारी है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय मुद्दों को लेकर कई विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है।

प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया, प्रतिबंधों, इंटरनेट बंद किए जाने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। JAAC ने रावलकोट में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो लोगों के घायल होने का दावा किया है और नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने की मांग की है।

भारत ने भी PoJK में हिंसा और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान में लोगों के असंतोष से निपटने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।

इमरान खान की जेल से राजनीतिक संकट कायम

पाकिस्तान का संकट केवल सुरक्षा और क्षेत्रीय असंतोष तक सीमित नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में मौजूदगी ने राजनीतिक तनाव को भी बनाए रखा है।

इमरान खान के बेटों सुलेमान खान और कासिम खान ने अपने पिता से परिवार, डॉक्टरों और वकीलों की मुलाकात को लेकर चिंता जताई है। उनका दावा है कि उन्हें लंबे समय से इमरान खान की स्थिति की पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पा रही है।

इमरान खान 2023 से विभिन्न मामलों में जेल में हैं। वह और उनके समर्थक लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर हुई कार्रवाई को लेकर भी पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।

भारत पर निशाना, लेकिन चुनौतियां पाकिस्तान के भीतर

पानी पाकिस्तान के लिए निश्चित तौर पर संवेदनशील मुद्दा है और सिंधु नदी प्रणाली उसकी कृषि तथा खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन भारत को चेतावनी देने के साथ-साथ इस्लामाबाद के सामने अपने देश के भीतर मौजूद कई गंभीर चुनौतियों से निपटना भी जरूरी है।

बलूचिस्तान में असंतोष, खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद, PoJK में विरोध प्रदर्शन और इमरान खान की गिरफ्तारी से जुड़ा राजनीतिक तनाव पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को जटिल बना रहे हैं।

ऐसे में शहबाज शरीफ का ‘पानी की हर बूंद रेड लाइन है’ वाला बयान भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ाने वाला है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पानी के मुद्दे पर दोनों देश टकराव का रास्ता अपनाते हैं या कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ते हैं।

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