
नई दिल्ली। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण को खत्म करने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा करने की कोशिश भी उन्हें और उनकी पार्टी को मंजूर नहीं है।
चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण किसी की दी हुई खैरात नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों का मौलिक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने सामाजिक न्याय और आरक्षण की व्यवस्था को लेकर अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई।
दरअसल, चिराग पासवान ने फरवरी 2020 में संसद के भीतर भी आरक्षण के मुद्दे को मजबूती से उठाया था। उन्होंने इसी पुराने वीडियो को शेयर करते हुए आरक्षण को लेकर अपनी पार्टी का रुख दोहराया है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण को समाप्त करने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा भी उनकी पार्टी को कभी स्वीकार्य नहीं है। चिराग पासवान ने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी प्रतिबद्धता अटूट है।
चिराग पासवान के इस बयान के बाद आरक्षण को लेकर चल रही बहस के बीच उनकी पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आरक्षण की व्यवस्था में किसी भी तरह की समीक्षा या बदलाव को वह स्वीकार नहीं करेंगे।














