
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुका है, लेकिन 23 अगस्त तक इसका औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। आम तौर पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगन के कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से सत्रावसान कर दिया जाता है। इस बार हुई देरी ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को तेज कर दिया है।
चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए संसद की मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है कि इन दोनों मुद्दों पर तत्काल नया विधायी कदम उठाया जाएगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर चर्चा तेज
महिला आरक्षण कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की संभावनाओं को लेकर पहले से राजनीतिक चर्चा चल रही है। इसी बीच बीजेपी की ओर से रविवार को महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाने की अपील ने इस बहस को और हवा दे दी।
गौरतलब है कि परिसीमन से संबंधित विधेयक 2026 में लोकसभा में पेश हो चुका है और लंबित विधेयकों में शामिल है। इसके अलावा सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन के जरिए लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक भी पहले पेश किया था, लेकिन उसे आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका था।
सत्रावसान में देरी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
संसद का सत्र 13 अगस्त को स्थगित होने के 10 दिन बाद भी औपचारिक सत्रावसान नहीं होने पर कांग्रेस ने सरकार से सवाल किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आम तौर पर स्थगन और सत्रावसान के बीच दो से चार दिन का अंतर होता है, हालांकि कुछ मौकों पर दोनों प्रक्रियाएं एक ही दिन पूरी हुई हैं।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि क्या सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस देरी को असामान्य बताते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
क्या सरकार दोबारा संसद में ला सकती है बिल?
फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े किसी नए विधेयक को दोबारा सदन में लाने को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम और सत्रावसान में देरी के कारण इन दोनों मुद्दों को लेकर अटकलें जरूर तेज हो गई हैं।
सरकार के लिए महिला आरक्षण कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करना महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा माना जा रहा है। वहीं, परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर विपक्ष पहले से ही अपनी आपत्तियां दर्ज कराता रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। ऐसे में परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं।
फिलहाल संसद का मानसून सत्र औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है और इसी वजह से सरकार के अगले कदम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। हालांकि, बिना आधिकारिक घोषणा के यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार निश्चित रूप से इसी अवधि में महिला आरक्षण या परिसीमन बिल पारित कराने जा रही है।














