
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP ) सोमवार को अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक आयोजित करेगी। बैठक में केंद्र सरकार की ओर से किए गए उन वादों और आश्वासनों की समीक्षा की जाएगी, जिनके आधार पर 25 जुलाई को देशव्यापी आंदोलन वापस लिया गया था। पार्टी ने कहा है कि यदि सरकार अपने वादों को पूरा करने में पीछे हटती है तो इसे देश के युवाओं के साथ विश्वासघात माना जाएगा।
सीजेपी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के दौरान सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को लागू करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में अब तक कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में सरकार के रुख और अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।
शांतिपूर्ण आंदोलन दोबारा शुरू करने पर भी विचार
पार्टी ने कहा कि बैठक में सरकार से किए गए वादों को लागू कराने के लिए उपलब्ध सभी विकल्पों पर चर्चा होगी। इनमें एक बार फिर शांतिपूर्ण देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की संभावना भी शामिल है।
सीजेपी ने कहा कि उसने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा करते हुए अच्छे विश्वास के साथ आंदोलन वापस लिया था। पार्टी का कहना है कि इस भरोसे को उसकी कमजोरी समझने की गलती नहीं की जानी चाहिए।
पार्टी ने छात्रों, युवाओं, समर्थकों और स्वयंसेवकों से सोमवार की बैठक के फैसले के लिए तैयार रहने की अपील की है।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई का भी मुद्दा
सीजेपी ने कहा कि यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट की हालिया कार्रवाई के बीच सामने आई है। संगठन के मुताबिक, 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की संयुक्त सूची मांगी थी।
पार्टी का दावा है कि अदालत इस सूची को तीन बार मांग चुकी है, ताकि मामलों को रद्द करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों के इस्तेमाल पर विचार किया जा सके। सीजेपी का आरोप है कि बार-बार सूची मांगे जाने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से इसे उपलब्ध कराने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया।
वादों में देरी को लेकर चेतावनी
सीजेपी ने चेतावनी दी कि सरकार की ओर से वादों को कमजोर करने, उनमें देरी करने, उनकी अलग व्याख्या करने या उन्हें पूरा न करने की किसी भी कोशिश को युवाओं के साथ विश्वासघात माना जाएगा।
संगठन के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी चिंता जताई। उनका कहना है कि आंदोलन वापस लेते समय सरकार की ओर से किए गए वादों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है।
अब सभी की नजरें सोमवार को होने वाली राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक पर हैं, जहां पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी।














